वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
मानवाधिकार संगठनों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि यदि सार्वजनिक स्थानों पर बुजुर्ग महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो यह प्रशासन की विफलता है
हावड़ा। हावड़ा के ऐतिहासिक कालीबाबू बाजार में गुरुवार को सरेआम हुई एक बर्बरतापूर्ण घटना ने न केवल इंसानियत को शर्मसार किया, बल्कि अपराधियों के बेखौफ हौसलों की भी पोल खोल दी। बाजार में ईमानदारी से सब्जी बेचकर अपनी आजीविका चलाने वाली एक वृद्ध महिला और उसकी पोती को केवल इसलिए बेरहमी से पीटा गया, क्योंकि उन्होंने एक दबंग की अवैध रंगदारी की मांग को ठुकरा दिया था। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी बच्चा सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना की शुरुआत उस समय हुई जब आरोपी बच्चा सिंह ने सब्जी बेच रही बुजुर्ग महिला से जबरन पैसों की मांग की। उम्र के इस पड़ाव में हाड़-तोड़ मेहनत करने वाली वृद्धा ने जब पैसे देने में असमर्थता जताई, तो आरोपी ने अपना आपा खो दिया। उसने न केवल वृद्धा को भद्दी गालियां दीं, बल्कि उनकी दुकान को तहस-नहस करने की कोशिश करते हुए उन पर हाथ उठा दिया। अपनी दादी को बेबस पिटता देख जब मासूम पोती बीच-बचाव करने आई, तो आरोपी ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए दोनों महिलाओं को बीच सड़क पर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। इस घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, हावड़ा से लेकर कोलकाता तक लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। इंटरनेट यूजर्स ने इसे समाज के लिए एक गहरा कलंक बताते हुए आरोपी को ऐसी सजा देने की मांग की है जो भविष्य के लिए नजीर बन सके।
मानवाधिकार संगठनों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि यदि सार्वजनिक स्थानों पर बुजुर्ग महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो यह प्रशासन की विफलता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हावड़ा पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज की और कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी बच्चा सिंह को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि बाजार क्षेत्रों में अब सीसीटीवी निगरानी और पुलिस की गश्त बढ़ाई जाएगी ताकि फिर कोई बच्चा सिंह किसी गरीब का हक छीनने या उन पर हाथ उठाने की हिम्मत न कर सके। हालांकि, आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में है, लेकिन इस घटना ने कालीबाबू बाजार के अन्य छोटे दुकानदारों के मन में एक गहरा डर पैदा कर दिया है।
सवाल वही है कि क्या कड़ी मेहनत कर दो वक्त की रोटी कमाने वालों को ऐसे अपराधियों के खौफ से कभी स्थायी आजादी मिल पाएगी?