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सूत्रों का दावा है कि सोना पप्पू पुलिस की गिरफ्त से दूर रहकर भी फोन के जरिए लगातार सक्रिय है
कोलकाता। महानगर की कानून व्यवस्था और पुलिसिया इकबाल पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। कांकुलिया गोली-बम कांड का मुख्य आरोपी विश्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू, जिसे कोलकाता पुलिस महीनों से कागजों पर तलाश रही है, न केवल कानून की पहुंच से बाहर है, बल्कि खुलेआम शहर में भव्य इफ्तार पार्टी का आयोजन करने जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस आरोपी को पुलिस लापता बता रही है, उसी के नाम से छपे निमंत्रण पत्र राजधानी की गलियों में बांटे जा रहे हैं और सत्ताधारी दल के दिग्गज नेताओं को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है।
आगामी 18 मार्च को आयोजित होने वाली इस इफ्तार पार्टी और 21 मार्च को ईद के कार्यक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। बोसपुकुर पश्चिमपाड़ा ईद कमिटी के बैनर तले होने वाले इस आयोजन के निमंत्रण कार्ड पर सोना पप्पू का नाम बतौर अध्यक्ष चमक रहा है। चर्चा है कि इस कार्यक्रम में मेयर फिरहाद हकीम, सांसद माला रॉय और मंत्री जावेद अहमद खान जैसे कद्दावर चेहरों को न्योता भेजा गया है। सबसे ज्यादा चर्चा वैश्वानर चट्टोपाध्याय के नाम की है, जिन्हें पहले भी विपक्षी दलों द्वारा सोना पप्पू का संरक्षक बताया जा चुका है।
सूत्रों का दावा है कि सोना पप्पू पुलिस की गिरफ्त से दूर रहकर भी फोन के जरिए लगातार सक्रिय है। वह न केवल कार्यकर्ताओं को निर्देश दे रहा है, बल्कि कार्यक्रम के प्रचार के लिए बाकायदा एक वीडियो संदेश भी जारी किया गया है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि यह पूरा आयोजन कस्बा थाने से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर होना तय हुआ है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जो आरोपी तकनीक के दौर में फोन पर सक्रिय है और सार्वजनिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर रहा है, वह पुलिस की रडार से बाहर कैसे है? क्या यह पुलिस की विफलता है या फिर राजनीतिक रसूख का दबाव?
गौरतलब है कि कांकुलिया इलाके में हुई भीषण गोलीबारी और बमबाजी की घटना ने शहर को दहला दिया था। इस मामले में पुलिस ने कुल 23 लोगों को दबोचा था, लेकिन जांच की सुस्त रफ्तार और कमजोर पैरवी का नतीजा यह रहा कि 17 आरोपियों को आसानी से जमानत मिल गई। आर्म्स एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के बावजूद इतनी जल्दी रिहाई ने पहले ही व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। अब मुख्य आरोपी द्वारा सरेआम शक्ति प्रदर्शन की तैयारी ने विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे दिया है। विपक्षी नेताओं का सीधा आरोप है कि सत्ता पक्ष के दबाव में पुलिस केवल पकडऩे का नाटक कर रही है, जबकि आरोपी रसूखदारों की छत्रछाया में सुरक्षित है।