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एथलीट-फर्स्ट गवर्नेंस भारतीय खेलों के भविष्य का मार्गदर्शन करेगी: पीटी उषा

आईओए की अध्यक्ष पीटी उषा ने रविवार को स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजेएफआई) के स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि खिलाड़ियों की तैयारी, कल्याण और विकास खेल प्रशासकों तथा खेल संस्थाओं की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

16 Mar 2026

एथलीट-फर्स्ट गवर्नेंस भारतीय खेलों के भविष्य का मार्गदर्शन करेगी: पीटी उषा

नई दिल्ली। भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) अध्यक्ष पीटी ऊषा ने भारतीय खेलों में एथलीट-केंद्रित शासन व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि देश के खेल पारिस्थितिकी तंत्र का भविष्य ऐसी नीतियों से तय होना चाहिए जिनमें खिलाड़ियों को निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में रखा जाए।

आईओए की अध्यक्ष पीटी उषा ने रविवार को स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजेएफआई) के स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि खिलाड़ियों की तैयारी, कल्याण और विकास खेल प्रशासकों तथा खेल संस्थाओं की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इस सम्मेलन की मेजबानी दिल्ली स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट एसोसिएशन (डीएसजेए) कर रहा है।

पीटी उषा ने कहा, “एथलीट-फर्स्ट गवर्नेंस भारतीय खेलों के भविष्य का मार्गदर्शन करनी चाहिए। खिलाड़ियों की तैयारी, उनका कल्याण और विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए।”

भारतीय खेलों के बदलते परिदृश्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश इस समय अपने खेल सफर के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। बेहतर बुनियादी ढांचा, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और संस्थागत समर्थन के कारण भारतीय खिलाड़ी अब वैश्विक मंच पर अधिक आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “पिछले एक दशक में हमने देखा है कि देश में खेलों को समर्थन और सम्मान देने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। आज खिलाड़ियों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और मजबूत संस्थागत समर्थन मिल रहा है।”

पीटी उषा ने जमीनी स्तर पर खेलों के विकास के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय खेलों की असली ताकत गांवों, कस्बों और स्कूलों में छिपी हुई प्रतिभाओं में है, जिन्हें पहचानने और आगे बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “भारतीय खेलों की असली ताकत जमीनी स्तर पर है—गांवों, कस्बों और स्कूलों में जहां नई प्रतिभाएं सामने आने का इंतजार कर रही हैं। यदि हम कोचिंग, बुनियादी ढांचे और प्रतिभा पहचान में लगातार निवेश करते रहें, तो भारत लगातार विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार कर सकता है।”

पीटी उषा ने खेल पत्रकारिता की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि खेल पत्रकार केवल परिणाम बताने वाले नहीं होते, बल्कि वे खिलाड़ियों के संघर्ष, भावनाओं और उपलब्धियों की कहानियों को सामने लाते हैं। जिम्मेदार और गहन खेल पत्रकारिता देश में खेलों की मजबूत नींव तैयार करती है।

सम्मेलन के दौरान आयोजित एक पैनल चर्चा में आईओए के सीईओ रघुराम अय्यर ने कहा कि भारत इस समय अपने खेल विकास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां बढ़ती महत्वाकांक्षा, निवेश और भागीदारी देश को एक प्रमुख खेल राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि भारत खेलों में इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। हमारे पास महत्वाकांक्षा है और इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।”

अय्यर ने कहा कि खेलों में भारत की प्रगति को बनाए रखने के लिए मजबूत जमीनी खेल ढांचा तैयार करना बेहद जरूरी है, जिसकी शुरुआत समुदाय स्तर पर अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी बढ़ाने से होगी।

उन्होंने कहा, “हमें ऐसा खेल पारिस्थितिकी तंत्र बनाना होगा जिसमें समुदाय स्तर पर अधिक लोग खेलों में भाग लें। जब यह आधार तैयार होगा, तब सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को शीर्ष स्तर तक पहुंचने के लिए आवश्यक संसाधन और समर्थन दिया जाना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रमंडल खेल जैसे आयोजनों के साथ-साथ अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं की मेजबानी देश के खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और भारत की वैश्विक खेल पहचान को बढ़ाने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा, “एक राष्ट्र के रूप में हम बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी की दिशा में भी काम कर रहे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताएं उस दृष्टि का हिस्सा हैं, जिसके माध्यम से भारत भविष्य में ओलंपिक खेलों की मेजबानी की नींव तैयार कर रहा है।”
 

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