कार्यकर्ताओं का मानना है कि विवेक गुप्ता के कार्यकाल में जनता और प्रशासन के बीच जो खाई बन गई थी, विजय उपाध्याय उसे पाटने का काम करेंगे
कोलकाता। जोड़ासांको विधानसभा क्षेत्र में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस बार परफॉर्मेंस को सर्वोपरि रखते हुए मौजूदा विधायक विवेक गुप्ता की जगह वार्ड नंबर 20 के लोकप्रिय पार्षद विजय उपाध्याय को अपना योद्धा घोषित किया है। इस घोषणा के साथ ही जोड़ासांको की गलियों में ढोल-नगाड़ों और अबीर के साथ कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। स्थानीय लोगों के बीच यह संदेश साफ है—पार्टी ने मशीनी राजनीति के बजाय जमीनी जुड़ाव को प्राथमिकता दी है। टिकट मिलने की खबर मिलते ही भावुक हुए विजय उपाध्याय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा दोहराई। उन्होंने कहा कि दीदी ने मुझ जैसे एक साधारण सिपाही पर जो विश्वास जताया है, वह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। जोड़ासांको केवल एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि मेरी जन्मभूमि और कर्मभूमि है। यहाँ की हवाओं और यहाँ के लोगों के सुख-दुख से मेरा रग-रग का नाता है। मैं वादा करता हूँ कि जोड़ासांको की सेवा के लिए मेरा दरवाजा 24 घंटे खुला रहेगा।
गौरतलब है कि विजय उपाध्याय की छवि एक ऐसे नेता की रही है जो आपदा हो या उत्सव, हमेशा जनता के बीच खड़े नजर आते हैं। उपाध्याय की उम्मीदवारी पर मुहर लगते ही क्षेत्र के पार्षदों और संगठन के नेताओं ने भी राहत की सांस ली है। वार्ड नंबर 42 के पार्षद महेश शर्मा ने पार्टी के इस फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए निवर्तमान विधायक पर तीखा हमला बोला। शर्मा ने चुटकी लेते हुए कहा कि जोड़ासांको की जनता अब किसी साप्ताहिक विधायक की मोहताज नहीं रहेगी, जो केवल खास मौकों पर दर्शन देते थे। अब हमें एक ऐसा जनसेवक मिलने जा रहा है जो हमारे बीच का है और हर घड़ी उपलब्ध रहेगा।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि विवेक गुप्ता के कार्यकाल में जनता और प्रशासन के बीच जो खाई बन गई थी, विजय उपाध्याय उसे पाटने का काम करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी ने विजय उपाध्याय को मैदान में उतारकर न केवल गुटबाजी पर लगाम लगाई है, बल्कि हिंदी भाषी मतदाताओं और पुराने वफादारों को भी एक मजबूत संदेश दिया है। जोड़ासांको में भूमिपुत्र बनाम बाहरी की यह बहस अब खत्म होती दिख रही है, क्योंकि कार्यकर्ताओं का जोश यह बताने के लिए काफी है कि वे इस बार किसी भी सूरत में अपनी सीट पर कमल को खिलने नहीं देंगे। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विजय उपाध्याय अपनी इस लोकप्रियता को 4 मई के नतीजों में कितनी बड़ी जीत में तब्दील कर पाते हैं।