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पांच रेंज के डीआईजी बदले, 25 आईपीएस का तबादला
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य की कानून-व्यवस्था को अपने सीधे नियंत्रण में लेते हुए प्रशासनिक तंत्र पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। निष्पक्ष और हिंसारहित मतदान सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराते हुए आयोग ने बुधवार को एक साथ पांच पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया।
आयोग द्वारा जारी सख्त निर्देशों में कहा गया है कि सभी नवनियुक्त अधिकारी 19 मार्च की सुबह 11 बजे तक अनिवार्य रूप से अपनी नई जिम्मेदारियां संभाल लें। इस औचक फेरबदल के तहत राज्य की सबसे संवेदनशील रेंजों की कमान नए हाथों में सौंपी गई है, जिससे पुलिस महकमे के भीतर जबरदस्त हलचल मच गई है। आयोग की नई नियुक्तियों के अनुसार, राठौर अमितकुमार भरत को रायगंज रेंज का नया डीआईजी बनाया गया है, जबकि अजीत सिंह यादव को मुर्शिदाबाद की महत्वपूर्ण कमान सौंपी गई है। इसी तरह श्रीहरि पांडे को बर्धमान, कंकर प्रसाद बारुई को प्रेसिडेंसी रेंज और अंजलि सिंह को जलपाईगुड़ी रेंज का उत्तरदायित्व सौंपा गया है।
गौरतलब है कि 15 मार्च को चुनाव की तारीखों के एलान के बाद से ही राज्य में तबादलों का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले महज तीन दिनों के भीतर मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर जैसे शीर्ष पदों पर हुए बदलावों के बाद अब मध्यम स्तर के पुलिस नेतृत्व में किया गया यह फेरबदल अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जारी सूची के मुताबिक, कई अहम पदों पर तैनात अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव मिश्रा को एडीजी एवं आईजी, साउथ बंगाल के पद से हटाकर एडीजी, मॉडर्नाइजेशन एंड कोऑर्डिनेशन, पश्चिम बंगाल बनाया गया है। वहीं प्रवीण कुमार त्रिपाठी और सुनील कुमार चौधरी को आईजीपी, एसटीएफ, पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा सुकेश कुमार जैन को आईजीपी, इंटेलिजेंस ब्रांच और आकाश माघरिया तथा डॉ. कोटेश्वर राव को डीआईजी, आईबी के पद पर नियुक्त किया गया है। लक्ष्मी नारायण मीणा को एडीजी, करेक्शनल सर्विसेज के साथ अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।मध्य स्तर के अधिकारियों में भी बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। जोबी थॉमस, अविजीत बनर्जी, इंदिरा मुखर्जी, परिजात बिस्वास, प्रियब्रत राय और अमनदीप समेत कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। वहीं विभिन्न जिलों के एसपी स्तर के अधिकारियों जैसे कूचबिहार, मुर्शिदाबाद, बसीरहाट, हुगली और पश्चिम मेदिनीपुर में भी बदलाव देखने को मिला है।सूचना के अनुसार, ये तबादले जनहित में किए गए हैं और सभी अधिकारियों को तत्काल अपने नए पदों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के प्रशासनिक बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस प्रशासनिक फेरबदल पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक औपचारिक पत्र लिखकर इन तबादलों को संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार करार दिया है।
मुख्यमंत्री का तर्क है कि इस तरह के एकतरफा फैसले लेने से पहले राज्य सरकार से परामर्श करने और तीन नामों का पैनल मांगने की स्थापित संवैधानिक परंपरा का खुला उल्लंघन किया गया है। ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ताधारी पार्टी चुनाव हारने के डर से संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर बंगाल की प्रशासनिक मशीनरी को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे मुख्यमंत्री की हताशा बताया है।
प्रदेश भाजपा नेतृत्व का कहना है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और वह केवल शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने के अपने दायित्व का निर्वहन कर रहा है। भाजपा के अनुसार, निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए दागी या प्रभावशाली अधिकारियों का स्थानांतरण आयोग का विशेषाधिकार है। फिलहाल, जिस तेजी और कड़ाई के साथ बंगाल पुलिस का चेहरा बदला जा रहा है, उससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि आयोग इस बार राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी शुचिता को लेकर किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।