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अब बंगाल से तृणमूल सरकार का विसर्जन तय: संतोष
कोलकाता। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कोलकाता की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और वार्ड नंबर 45 से लगातार 22 सालों तक पार्षद रहे संतोष पाठक ने अपने चार दशकों पुराने कांग्रेस के साथ सफर को पीछे छोड़ते हुए भाजपा का दामन थाम लिया है। सोमवार को कोलकाता पार्टी ऑफिस में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब, भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय और लॉकेट चटर्जी की उपस्थिति में उन्होंने भाजपा का झंडा थामा। संतोष पाठक का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस और खासकर कोलकाता नगर निगम के विपक्षी खेमे के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। पार्टी ज्वाइन करने के बाद मीडिया से बात करते हुए पाठक ने कांग्रेस से भाजपा में जाने के कारण बताए। उन्होंने कहा, "मैंने चार दशक तक कांग्रेस की सेवा की, लेकिन आज देश की जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों को स्वीकार किया है। बंगाल में अगर असली परिवर्तन लाना है, तो वह केवल भाजपा के नेतृत्व में ही संभव है।"
संतोष पाठक ने अपनी पुरानी चुनावी जंगों का जिक्र करते हुए सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि वार्ड नंबर 45 में मुझे हराने के लिए तृणमूल कांग्रेस और उनके शीर्ष नेतृत्व ने पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन वहां की जनता के आशीर्वाद के कारण वे मुझे पराजित नहीं कर सके। अब मेरी व्यक्तिगत लड़ाई खत्म हो गई है, अब बारी ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को पूरे बंगाल से हराने की है। पाठक ने दावा किया कि भाजपा के साथ उनकी यह नई पारी बंगाल की राजनीति में निर्णायक साबित होगी।चौरंगी विधानसभा सीट से उनकी उम्मीदवारी को लेकर चल रही चर्चाओं पर संतोष पाठक ने राजनीतिक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मैं भाजपा में किसी टिकट की लालसा या सौदेबाजी के लिए नहीं आया हूँ। मैं चौरंगी से उम्मीदवार बनूंगा या नहीं, यह पूरी तरह से पार्टी नेतृत्व का निर्णय होगा। मेरा प्राथमिक उद्देश्य चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि बंगाल से ममता सरकार का विसर्जन सुनिश्चित करना है। मैं एक अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के लिए काम करूँगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संतोष पाठक के भाजपा में आने से मध्य कोलकाता, विशेषकर चौरंगी और आसपास के इलाकों में भाजपा की सांगठनिक शक्ति में इजाफा होगा। एक अनुभवी पार्षद और जमीन से जुड़े नेता के तौर पर पाठक की पकड़ न केवल हिंदी भाषी मतदाताओं बल्कि स्थानीय बंगाली समाज में भी काफी मजबूत मानी जाती है। चुनाव से ठीक पहले हुए इस दलबदल से भाजपा खेमे में उत्साह की लहर है।