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600 करोड़ का साइबर चक्रव्यूह, 1300 से अधिक ठगी के मामलों से जुड़े तार
कोलकाता। करोड़ों रुपये के अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी मामले में बंगाल पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मशहूर उद्योगपति पवन रूइया को गिरफ्तार किया है। बुधवार को बिधाननगर सब-डिवीजनल कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रूइया को 7 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस का दावा है कि यह केवल एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी का मामला नहीं है, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क है जिसके तार देश भर में फैले करीब 1,379 साइबर अपराधों से जुड़े हैं। पवन रूइया की गिरफ्तारी मंगलवार शाम करीब 4:45 बजे न्यूटाउन स्थित एक नामी होटल के बाहर से हुई। यह कार्रवाई कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा उस अंतरिम आदेश को रद्द करने के कुछ ही घंटों बाद की गई, जिसने रूइया और उनके परिवार को दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की थी। कोर्ट से सुरक्षा कवच हटते ही विधाननगर साइबर क्राइम पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। जांच की शुरुआत इको पार्क थाना क्षेत्र के एक बुजुर्ग नागरिक की शिकायत से हुई थी, जिनसे एक निवेश ऐप के जरिए 93 लाख रुपये की ठगी की गई थी।
पुलिस जांच में पता चला कि ठगी गई यह रकम शेल कंपनियों और कॉरपोरेट खातों के एक जटिल जाल के जरिए पवन रूइया और उनके परिवार से जुड़े बैंक खातों में भेजी गई थी। जांच में पहले 315 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का पता चला था। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर यह घोटाला अब 600 करोड़ तक पहुँच गया है। पुलिस का आरोप है कि अवैध कमाई को छिपाने और विदेश भेजने के लिए बड़े पैमाने पर क्रिप्टोकरेंसी का भी इस्तेमाल किया गया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील विवेक शर्मा ने दलील दी कि आज के डिजिटल युग में किसी बड़ी कंपनी के खाते में आने वाली हर छोटी रकम के स्रोत की तुरंत पहचान करना संभव नहीं है। उन्होंने इसे एक सामान्य ऑनलाइन लेन-देन की त्रुटि बताने की कोशिश की। इसके विपरीत, सरकारी वकील राजदीप बंद्योपाध्याय ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह मामला देश भर के सैकड़ों पीडि़तों से जुड़ा है और यह एक संगठित आर्थिक अपराध है। पवन रूइया का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले 2016 में भी उन्हें जेसप कारखाने से रेलवे उपकरण चोरी होने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
वर्तमान साइबर ठगी मामले में पुलिस ने उनके रूइया सेंटर सहित कई ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं। अब 7 दिनों की पूछताछ के दौरान पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस बड़े सिंडिकेट के पीछे और कौन से प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं।