तारातला में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही, 3 मजदूरों की मौत, 18 को बचाया गया
गौरतलब है कि अधीर रंजन चौधरी पिछले 25 वर्षों से बहरामपुर के सांसद हैं और इस बार भी वह कड़े मुकाबले में मैदान में हैं
कोलकाता। हाई-प्रोफाइल सीट बहरामपुर से कांग्रेस उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी बुधवार को एक भीषण सड़क हादसे का शिकार होते-होते बच गए। चुनाव प्रचार से लौटते समय उनके काफिले में शामिल एक गाड़ी को तेज रफ्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में अधीर रंजन चौधरी पूरी तरह सुरक्षित हैं, हालांकि काफिले की गाड़ी में मौजूद कई सुरक्षाकर्मियों को चोटें आई हैं। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, अधीर रंजन चौधरी बुधवार को कांदी इलाके में चुनावी जनसभा और प्रचार करने गए थे। शाम करीब 6:45 बजे जब वह कांदी से वापस बहरामपुर लौट रहे थे, तभी जीवंती इलाके के पास पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने उनके काफिले की एक कार को टक्कर मार दी। गनीमत यह रही कि जिस गाड़ी को ट्रक ने टक्कर मारी, अधीर रंजन चौधरी उसके ठीक पीछे वाली गाड़ी में सवार थे। दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ट्रक को घेर लिया, जिससे चालक भागने में सफल नहीं हो सका। कांग्रेस ने इस पूरी घटना को लेकर प्रशासन और पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
अधीर रंजन चौधरी के करीबियों का आरोप है कि दुर्घटना की सूचना तत्काल स्थानीय थाने को दी गई थी, लेकिन घटनास्थल से थाना पास होने के बावजूद करीब आधे घंटे तक कोई भी पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। कांग्रेस नेतृत्व ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए इसे एक बड़ी साजिश की ओर इशारा बताया है। पार्टी का कहना है कि अधीर रंजन के चुनावी कार्यक्रमों और रूट की पूरी जानकारी पुलिस के पास पहले से होती है, ऐसे में सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया है और स्थानीय प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। फिलहाल कांदी थाना पुलिस ने घातक ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि अधीर रंजन चौधरी पिछले 25 वर्षों से बहरामपुर के सांसद हैं और इस बार भी वह कड़े मुकाबले में मैदान में हैं। राज्य के स्टार प्रचारकों में शुमार होने के कारण उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक मंशा छिपी थी।