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'सीएम बनना है तो छोड़ें पीएम की कुर्सी'
कोलकाता बंगाल के चुनावी रण में वार-पलटवार का दौर अब व्यक्तिगत तंज तक जा पहुँचा है। बीरभूम के सिउड़ी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। हाल ही में सिलीगुड़ी में पीएम मोदी द्वारा खुद को राज्य की सभी 294 सीटों का एकमात्र चेहरा और उम्मीदवार बताने वाले बयान पर कटाक्ष करते हुए ममता ने उन्हें खुली चुनौती दे डाली। उन्होंने सीधे लहजे में कहा कि अगर प्रधानमंत्री को बंगाल की सभी सीटों पर खुद ही चुनाव लडऩा है, तो उन्हें पहले दिल्ली की कुर्सी और अपना पद त्याग देना चाहिए।
ममता बनर्जी ने मोदी के बयान को निशाने पर लेते हुए सवाल किया कि प्रधानमंत्री को पहले यह तय करना चाहिए कि वह देश चलाना चाहते हैं या बंगाल का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को बाहरी करार देते हुए सलाह दी कि उन्हें पहले दिल्ली और देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि बंगाल की सत्ता के लिए इस तरह के दावे करने चाहिए। ममता के इस बयान ने राज्य के सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है, जहाँ तृणमूल इसे बंगाल की बेटी बनाम बाहरी की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है। रोजगार के मुद्दे पर केंद्र को घेरते हुए मुख्यमंत्री ने 2 करोड़ नौकरियों के पुराने वादे की याद दिलाई। उन्होंने तंज कसा कि रेलवे और सेना जैसे महत्वपूर्ण विभागों में पद खाली पड़े हैं, लेकिन केंद्र का ध्यान केवल विज्ञापनों पर है।
ममता ने आरोप लगाया कि जब भी राज्य सरकार युवाओं को नौकरी देने की पहल करती है, विपक्षी दल कानूनी अड़चनें पैदा कर नियुक्तियों को अदालतों में खिंचवा देते हैं। इसी बीच उन्होंने बीरभूम के लिए देवचा-पंचमी कोयला परियोजना का कार्ड खेलते हुए दावा किया कि 32 हजार करोड़ के इस निवेश से क्षेत्र के 2 लाख युवाओं की किस्मत बदलेगी। भाषण के दौरान ममता बनर्जी ने मन की बात से लेकर एनआरसी तक हर मोर्चे पर भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने भाजपा पर धर्म के नाम पर समाज में जहर घोलने का आरोप लगाते हुए अपने रुख को मानवतावादी बताया। साथ ही, भाजपा के भ्रष्टाचार विरोधी चार्जशीट अभियान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कोयला और बंदरगाहों से जुड़े कथित घोटालों का जिक्र कर केंद्र के नेताओं को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। सभा के अंत में चुनाव आयोग के कड़े रुख पर भी नाराजगी जताते हुए ममता ने साफ कर दिया कि वह और उनकी पार्टी केंद्र की दमनकारी नीतियों के खिलाफ पीछे हटने वाली नहीं हैं।