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शपथ ग्रहण के वीआईपी जमावड़े के बीच भी नहीं थमी कोलकाता की रफ्तार
कोलकाता। शनिवार को रबींद्र जयंती के पावन अवसर पर ब्रिगेड परेड ग्राउंड एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना, जब बंगाल की पहली भाजपा सरकार ने सत्ता की कमान संभाली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसी हाई-प्रोफाइल हस्तियों की मौजूदगी के बावजूद, कोलकाता की सड़कों पर यातायात की व्यवस्था सुचारू बनी रही। अमूमन ब्रिगेड की रैलियों के दौरान जाम के लिए मशहूर कोलकाता ने इस बार एक संयमित और योजनाबद्ध ट्रैफिक प्रबंधन का उदाहरण पेश किया, जिससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली।
कोलकाता पुलिस की ओर से जारी पूर्व एडवाइजरी और सख्त डायवर्जन प्लान ने इस सफलता में बड़ी भूमिका निभाई। वीवीआईपी सुरक्षा के मद्देनजर एस्प्लेनेड रैंप, केपी रोड, हॉस्पिटल रोड और क्वींसवे जैसे प्रमुख मार्गों पर यातायात को नियंत्रित किया गया था, लेकिन वैकल्पिक रास्तों की स्पष्ट जानकारी होने के कारण सड़कों पर अफरा-तफरी नहीं दिखी। हालांकि, उत्तर और दक्षिण कोलकाता को जोडऩे वाले कुछ रास्तों पर वाहनों को मोड़ा गया, फिर भी शहर के बाकी हिस्सों में जनजीवन सामान्य बना रहा। मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर रोक और रणनीतिक पार्किंग प्रबंधन ने दबाव को काफी हद तक कम कर दिया।
सुबह से ही ब्रिगेड के चारों ओर भाजपा समर्थकों का हुजूम उमडऩा शुरू हो गया था। पार्क स्ट्रीट से फोर्ट विलियम और आउटरम रोड तक कार्यकर्ताओं की कतारें देखी गईं, जिससे पूर्वी महानगर बाइपास पर वाहनों की गति कुछ धीमी अवश्य हुई, लेकिन कहीं भी पहिए थमे नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि यह एक औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह था, न कि कोई विशाल राजनीतिक रैली, इसलिए बसों और ट्रकों का वैसा रेला नहीं दिखा जो अक्सर शहर की नब्ज रोक देता है।
प्रशासन की मुस्तैदी और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के बीच राज्यपाल आर.एन. रवि ने शुभेंदु को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। इस भव्य प्रशासनिक आयोजन के बीच कोलकाता पुलिस ने केवल संवेदनशील इलाकों पर ध्यान केंद्रित कर पूरे शहर को जाम से बचाए रखा। राजनीतिक रूप से एक बड़े सत्ता परिवर्तन का दिन होने के साथ-साथ यह दिन कोलकाता के बेहतरीन प्रशासनिक और यातायात समन्वय के लिए भी याद किया जाएगा।