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आरजी कर मामले की सुनवाई से अलग हुई न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की पीठ

खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार संभवतः एक न्यायिक आयोग गठित करने की प्रक्रिया में है। ऐसे में मामले की विस्तृत सुनवाई किसी अन्य उपयुक्त पीठ द्वारा की जा सकती है।

12 May 2026

आरजी कर मामले की सुनवाई से अलग हुई न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की पीठ

कोलकाता। आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज चिकित्सक-छात्रा दुष्कर्म और हत्या मामला की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की खंडपीठ ने मामले से स्वयं को अलग कर लिया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि अदालत में मामलों का अत्यधिक दबाव है और न्यायहित में यह मामला ऐसी पीठ को सौंपा जाना चाहिए जो पर्याप्त समय दे सके।

खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार संभवतः एक न्यायिक आयोग गठित करने की प्रक्रिया में है। ऐसे में मामले की विस्तृत सुनवाई किसी अन्य उपयुक्त पीठ द्वारा की जा सकती है।

मंगलवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने मामले में स्थिति रिपोर्ट कलकत्ता उच्च न्यायालय में पेश की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। पिछली सुनवाई में न्यायमूर्ति मंथा की पीठ ने कहा था कि आवश्यकता पड़ने पर सीबीआई दोषसिद्ध आरोपित तथा अन्य संदिग्धों से दोबारा पूछताछ कर सकती है। जांच को आगे बढ़ाने के लिए एजेंसी को किसी भी व्यक्ति से पूछताछ करने की अनुमति दी गई थी।

इससे पहले मार्च में न्यायमूर्ति देवांशु बसाक की खंडपीठ भी पीड़िता के परिवार द्वारा दायर मामले की सुनवाई से अलग हो गई थी। अदालत ने कहा था कि मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग की जा रही है, लेकिन समयाभाव के कारण विस्तृत सुनवाई संभव नहीं हो पा रही है।

गौरतलब है कि नौ अगस्त 2024 को आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक चिकित्सक-छात्रा का शव बरामद हुआ था। घटना के अगले दिन कोलकाता पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय राय को गिरफ्तार किया था। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।

18 जनवरी 2025 को सियालदह अदालत ने मामले में फैसला सुनाते हुए संजय राय को दोषी करार दिया था। इसके बाद 20 जनवरी को न्यायाधीश अनिर्वाण दास ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हालांकि फैसले से पहले पीड़िता के माता-पिता ने सीबीआई जांच पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उस समय मामला उच्चतम न्यायालय में भी लंबित था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि इस मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय ही करेगा, जिसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी थी।

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