Please wait
select city
notifications
Live Tv
Search
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कठोर दंडः संघ Sudhir wins historic डायमंड हार्बर में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नया मामला, ‘सेवाश्रय’ शिविर जांच के घेरे में Sudhir wins historic विपक्षी विधायकों को मिलेगा समान सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकार, विधानसभा में बोले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी Sudhir wins historic तृणमूल के तीन बैंक खातों पर रोक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, बैंक से हलफनामा और पुलिस से जांच रिपोर्ट तलब Sudhir wins historic बंगाल की खाड़ी में बन रहा गहरा निम्न दबाव, चार से आठ जुलाई तक दक्षिण बंगाल में भारी बारिश की चेतावनी Sudhir wins historic विधाननगर अस्पताल का नाम बदला, मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाए सवाल Sudhir wins historic बंगाल में फिर गहराया बारिश का खतरा, सप्ताहांत में भारी से अति भारी वर्षा की चेतावनी Sudhir wins historic भड़काऊ बयान मामले में दो थानों से तलब किए जाने पर बोले हुमायूं कबीर — 'गिरफ्तार करना है तो कर लें, परवाह नहीं' Sudhir wins historic अंडा फेंकने की घटनाओं पर कलकत्ता हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट Sudhir wins historic रामनवमी हिंसा मामले में अपरूपा पोद्दार के पति शाकिर अली गिरफ्तार Sudhir wins historic

पश्चिम बंगाल में ममता का आखिरी किला ढहा, फलता में भाजपा की एक लाख वोटों से ऐतिहासिक जीत

पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस के मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर दिया। भाजपा प्रत्याशी देबाशीष पांडा ने एक लाख से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। इस परिणाम को राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

24 May 2026

पश्चिम बंगाल में ममता का आखिरी किला ढहा, फलता में भाजपा की एक लाख वोटों से ऐतिहासिक जीत

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस के मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर दिया। भाजपा प्रत्याशी देबाशीष पांडा ने एक लाख से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। इस परिणाम को राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे “तृणमूल कांग्रेस के पतन की शुरुआत” बताते हुए पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि फलता की जनता ने वर्षों बाद स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान कर लोकतंत्र को पुनर्स्थापित किया है।

उपचुनाव के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी जहांगिर खान को लेकर रही। मतदान से दो दिन पहले उन्होंने चुनाव मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही थी।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रचार के अंतिम दिन भाजपा प्रत्याशी को एक लाख वोटों से जिताने का लक्ष्य रखा था। मतगणना के 18 राउंड तक भाजपा उम्मीदवार करीब 92 हजार वोटों से आगे चल रहे थे, जबकि अंतिम जीत का अंतर एक लाख आठ हजार से अधिक पहुंच गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पिछले लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस को करीब 1.70 लाख वोटों की बढ़त मिली थी, लेकिन इस उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार को महज साढ़े पांच हजार के आसपास वोट मिले।

मतदान के दौरान कई बूथों पर तृणमूल कांग्रेस का काेई एजेंट मौजूद नहीं था। वहीं, मतगणना केंद्र में भी पार्टी की सक्रियता बेहद कमजोर दिखाई दी।

इस उपचुनाव में वाममोर्चा समर्थित उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी ने लगभग 37 हजार वोट हासिल कर ध्यान खींचा। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुर रज्जाक मोल्ला को करीब साढ़े नौ हजार वोट मिले।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस के कमजोर पड़ने से राज्य की विपक्षी राजनीति में नई संभावनाएं बन सकती हैं।

फलता उपचुनाव की पृष्ठभूमि काफी विवादित रही। विधानसभा चुनाव के दौरान कई बूथों के ईवीएम में इत्र, स्याही और टेप लगाए जाने जैसी अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने चुनाव रद्द कर पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया था।

इसी दौरान जहांगिर खान और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अजयपाल शर्मा के बीच तनाव की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में सुर्खियों में रहीं।

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद फलता में तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक सक्रियता लगभग ठप पड़ गई थी। स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय से वोट नहीं डाल पाने और “थ्रेट कल्चर” के आरोपों को भाजपा ने चुनावी मुद्दा बनाया।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कई जनसभाएं और रोड शो किए, जिनमें भारी भीड़ देखने को मिली। उन्होंने फलता के लिए विशेष विकास पैकेज की भी घोषणा की थी, जिसका असर मतदाताओं पर स्पष्ट दिखाई दिया।

चुनाव परिणाम के बाद शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर लंबा संदेश जारी करते हुए कहा कि फलता की जनता ने लोकतंत्र को फिर से स्थापित किया है। मैं यहां के मतदाताओं को नमन करता हूं, जिन्होंने भाजपा प्रत्याशी को एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से जिताया। विकास के माध्यम से हम इस विश्वास का ऋण चुकाएंगे।

उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग, सिंडिकेट राज और डर की राजनीति चलाने का आरोप लगाया। बिना नाम लिए जहांगिर खान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि “एक तथाकथित सेनापति ने लोकतंत्र का गला घोंटने में कोई कसर नहीं छोड़ी।”

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि “15 वर्षों बाद लोगों को स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अवसर मिला और असली जनमत सामने आया।”

राजनीतिक हलकों में इस जीत को पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीति का संकेत माना जा रहा है। भाजपा इसे बड़े जनादेश के रूप में पेश कर रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठनात्मक पकड़ बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।

गौरतलब है कि, जिस क्षेत्र में टीएमसी को यह करारी हार मिली है, वह डायमंड हार्बर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व लाेकसभा में सांसद हैं।

Ad Image
Comments

No comments to show. Log in to add some!

Other Relevant Stories


पश्चिम बंगाल में ममता का आखिरी किला ढहा, फलता में भाजपा की ए
पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस के मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर दिया। भा





Download The Taaza Tv App Now to Stay Updated on the Latest News!


play store download
app store download
app img


Breaking News