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सत्ता बदलते ही गोघाट में तृणमूल नेताओं के खिलाफ फूटा गुस्सा, ‘कटमनी लौटाओ’ पोस्टरों से मचा हड़कंप

फिलहाल इलाके में लगाए गए पोस्टर और स्थानीय लोगों के आरोप राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं

25 May 2026

सत्ता बदलते ही गोघाट में तृणमूल नेताओं के खिलाफ फूटा गुस्सा, ‘कटमनी लौटाओ’ पोस्टरों से मचा हड़कंप

हुगली। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद हुगली जिले के गोघाट इलाके में तृणमूल कांग्रेस के दो स्थानीय नेताओं के खिलाफ लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। गोघाट के श्यामबाजार इलाके में सोमवार को पूर्व तृणमूल नेताओं शाहाबुद्दीन खान और उनके भाई गियासउद्दीन खान के घरों के बाहर “कटमनी और भ्रष्टाचार का पैसा लौटाओ” जैसे पोस्टर लगाए जाने से इलाके में भारी हलचल मच गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कभी जर्जर मिट्टी के घर में रहने वाले दोनों भाइयों ने तृणमूल शासन के दौरान तेजी से राजनीतिक प्रभाव हासिल किया और कुछ ही वर्षों में आलीशान बहुमंजिली इमारतों के मालिक बन गए। शाहाबुद्दीन खान को गोघाट-2 पंचायत समिति में कर्माध्यक्ष और ब्लॉक तृणमूल अध्यक्ष का पद मिला था। इसके बाद वह पूरे इलाके में प्रभावशाली नेता बन गए। उनके भाई गियासउद्दीन का राजनीतिक उभार भी इसी दौरान हुआ। वर्ष 2018 में श्यामबाजार पंचायत के प्रधान बनने के बाद उनका प्रभाव लगातार बढ़ता गया।
ग्रामीणों का दावा है कि दोनों भाइयों की संपत्ति का स्रोत अवैध वसूली, उगाही और भ्रष्टाचार का पैसा है। लोगों के अनुसार, श्यामबाजार पंचायत के शांतिपुर इलाके में सड़क किनारे बने उनके विशाल मकान आज भी इलाके में चर्चा का विषय हैं। आरोप यह भी है कि उन्होंने अपने करीबी रिश्तेदारों के लिए भी आलीशान मकान बनवाए।
स्थानीय निवासियों ने दोनों नेताओं और उनके समर्थकों पर महिलाओं के उत्पीड़न के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि इलाके में भय का ऐसा माहौल था कि महिलाएं और परिवार खुलकर विरोध नहीं कर पाते थे। लोगों का आरोप है कि बाजार के दुकानदारों को बिना पैसे सामान देना पड़ता था और विरोध करने पर मारपीट, घरों में तोड़फोड़ और आगजनी जैसी घटनाएं होती थीं।
ग्रामीणों ने कहा कि सत्ता बदलने के बाद अब लोग खुलकर बोलने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों तक डर और दबाव में रहने के बाद अब गांवों में “भय आउट, भरोसा इन” का माहौल बन रहा है।
हालांकि शाहाबुद्दीन खान और गियासउद्दीन खान ने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल इलाके में लगाए गए पोस्टर और स्थानीय लोगों के आरोप राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं।

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