वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
कुख्यातों के कमर में रस्सी, सिर मुंडाया और सड़कों पर घुमाया
कोलकाता। बंगाल में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद सूबे की पुलिस का मिजाज और अपराधियों से निपटने का अंदाज पूरी तरह बदल चुका है। उत्तर हावड़ा से लेकर सांकराइल तक इन दिनों खाकी का एक नया रूप चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जिसे हाफ पैंट मॉडल कहा जा रहा है। राज्य में भाजपा सरकार के आते ही पुलिस ने खूंखार अपराधियों और वसूलीबाजों का खौफ जनता के दिलों से निकालने के लिए एक सख्त नीति अपनाई है। अब संगीन वारदातों के आरोपियों को हाफ पैंट और सैंडो बनियान पहनाकर, कमर में मोटी रस्सी बांधकर सरेआम सड़कों पर पैदल घुमाया जा रहा है। इस कड़ी कार्रवाई की शुरुआत रविवार को उत्तर हावड़ा की सड़कों पर देखने को मिली, जहां कभी इलाके में अपनी दहशत फैलाने वाले कुख्यात डॉन आकाश सिंह का पुलिस ने पहले सिर मुंडवाया और फिर उसे अर्धनग्न हालत में पूरे इलाके में पैदल मार्च कराया। आकाश सिंह पर साल 2021 में पुलिसकर्मियों पर ही सीधे गोली चलाने, बमबाजी करने और रंगदारी सहित 20 से ज्यादा संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस का साफ संदेश है कि समाज में आतंक फैलाने वालों का हश्र अब यही होगा।
उत्तर हावड़ा में डॉन की इस फजीहत के ठीक अगले ही दिन यानी सोमवार को सांकराइल इलाके में भी पुलिस का यही हाफ पैंट मॉडल दोहराया गया। यहाँ करोड़ों रुपये की उगाही और वसूली के आरोप में गिरफ्तार किए गए ट्रैफिक होमगार्ड शाहिन मोल्ला उर्फ सनी की भी इसी अंदाज में परेड निकाली गई। कमर में रस्सी बंधे और सैंडो बनियान पहने शाहिन मोल्ला को भारी केंद्रीय बलों और स्थानीय पुलिस के कड़े घेरे में बेलतला से लेकर नलपुर तक सड़कों पर पैदल चलाया गया। गौरतलब है कि शाहिन को बीते 23 मई को सांकराइल थाने की पुलिस ने दबोचा था और सोमवार को अदालत में पेशी के बाद उसे चार दिनों की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। आरोपी शाहिन को पूर्व तृणमूल विधायक प्रिया पाल का बेहद करीबी और खास सिपहसालार माना जाता था, जिसका इलाके के ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों के बीच बड़ा रसूख था। लेकिन सत्ता बदलते ही पुलिस ने उसके इस रसूख को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है।
महानगर और आसपास के जिलों में पुलिस के इस बदले और बेहद आक्रामक तेवर को लेकर अब चौराहों से लेकर सियासी गलियारों तक तीखी बहस छिड़ गई है। आम जनता का एक बड़ा वर्ग जहाँ इसे अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा करने वाला कड़ा और जरूरी कदम बताकर पुलिस की जमकर सराहना कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार संगठनों और कानूनी जानकारों ने मानवीय गरिमा और अदालती प्रक्रिया का हवाला देते हुए इस पर गंभीर सवाल भी उठाने शुरू कर दिए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर राज्य के पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अरिंदम आचार्य ने प्रतिक्रिया देते हुए पुलिसिया कार्रवाई का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून की किताबें और धाराएं पहले भी यही थीं, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान उन्हें जमीन पर कड़ाई से लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की भारी कमी थी। अब नई सरकार की नीति और नीयत पूरी तरह साफ है, जिसके कारण पुलिस बिना किसी राजनीतिक दबाव के स्वतंत्र और सक्रिय होकर काम कर रही है।