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‘लक्ष्मी भंडार’ घोटाला :  लाभार्थी को नहीं मिला पैसा, दूसरे खाते में जाती रही रकम

पांच साल तक सरकारी राशि गलत खाते में जाने के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं

02 Jun 2026

‘लक्ष्मी भंडार’ घोटाला :  लाभार्थी को नहीं मिला पैसा, दूसरे खाते में जाती रही रकम

मालदा। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के हरिश्चंद्रपुर से ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना में बड़े भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला मंगलवार को सामने आया है। आरोप है कि एक महिला के नाम पर जारी सरकारी सहायता राशि पिछले पांच वर्षों से लगातार एक पुरुष के बैंक खाते में जमा होती रही। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में हंगामा मच गया है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए है।
मामले के केंद्र में हरिश्चंद्रपुर के सोनाकुल गांव की निवासी नून नाहर हैं, जिन्होंने वर्ष 2021 में इस योजना के लिए आवेदन किया था। उनका आरोप है कि उन्हें आज तक एक भी किश्त नहीं मिली। जबकि दस्तावेजों और बैंक स्टेटमेंट से खुलासा हुआ है कि 2021 से 2026 तक उनके नाम पर जारी राशि स्थानीय गृह शिक्षक गोलाम मोर्तुजा के बैंक खाते में जाती रही। घटना सामने आने के बाद गोलाम मोर्तुजा ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी और मीडिया से सूचना मिलने के बाद ही उन्होंने बैंक जाकर जांच की। हालांकि, उनके इस दावे पर सवाल उठ रहे है कि आखिर पांच साल तक खाते में पैसा आने के बावजूद उन्हें इसकी जानकारी कैसे नहीं हुई।
पीड़िता नून नाहर का कहना है कि उन्होंने कई बार ‘दुआरे सरकार’ शिविरों में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे वह योजना के लाभ से वंचित रह गईं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस मामले को बड़ा घोटाला बताते हुए दावा किया है कि 300 से अधिक परिवार इस गड़बड़ी के शिकार हो सकते हैं। बीजेपी नेता ओमप्रकाश घोष ने आरोप लगाया कि सिर्फ ‘लक्ष्मी भंडार’ ही नहीं, बल्कि वृक्षारोपण योजना और इंदिरा आवास योजना में भी व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के विधायक मतिबुर रहमान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस मामले में स्थानीय प्रशासन, बीडीओ कार्यालय और पूर्व विधायक ताजमुल हुसैन के करीबी लोगों की संलिप्तता हो सकती है।
पांच साल तक सरकारी राशि गलत खाते में जाने के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह महज लापरवाही है या संगठित भ्रष्टाचार, इसकी जांच अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई है।

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