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कोर्ट परिसर में गूंजे 'चोर-चोर' के नारे, 10 जून तक पुलिस रिमांड
कोलकाता। कोलकाता नगर निगम के 42 नंबर वार्ड से तृणमूल पार्षद महेश कुमार शर्मा की गिरफ्तारी के बाद बड़ाबाजार से लेकर बैंकशाल कोर्ट तक का इलाका जबरदस्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और धोखाधड़ी के संगीन आरोपों में घिरे पार्षद को जब पुलिस बड़ाबाजार थाने से निकालकर अदालत ले जाने लगी, तो बाहर खड़े लोगों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा। उग्र भीड़ ने आरोपी पार्षद को निशाना बनाते हुए उन पर सड़े हुए अंडे और टमाटर फेंके। इस दौरान हवा में लगातार चोर-चोर के नारे गूंजते रहे, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
यह हंगामा सिर्फ थाने के बाहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बैंकशाल कोर्ट परिसर पहुंचने पर भी तनाव चरम पर पहुंच गया। अदालत में पेशी के बाद जैसे ही पुलिस महेश शर्मा को वापस प्रिजन वैन में बैठाने के लिए बाहर निकली, वहां मौजूद लोगों के एक बड़े समूह ने दोबारा उनके खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते माहौल इस कदर गरमाया कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने आनन-फानन में पार्षद के चारों तरफ एक अभेद्य सुरक्षा घेरा बनाया और उन्हें भीड़ के बीच से सुरक्षित निकालकर वहां से रवाना किया। अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की तीखी दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने महेश शर्मा की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 10 जून तक पुलिस हिरासत में भेजने का निर्देश दे दिया है।
गौरतलब है कि महेश शर्मा के खिलाफ यह पूरी कार्रवाई पिछले साल बड़ाबाजार थाने में दर्ज कराई गई एक लिखित शिकायत के आधार पर हुई है, जिसमें उन पर स्थानीय व्यापारियों को धमकाकर मोटी रकम वसूलने और धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। महीनों तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद, राज्य में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन के साथ ही इस फाइल को दोबारा खोला गया। पुलिस को जांच में कुछ ऐसे अकाट्य सबूत मिले कि बुधवार देर रात ही पार्षद को दबोच लिया गया। अब जांच एजेंसियां इस जबरन वसूली सिंडिकेट की अंतिम कडिय़ों और उनके रसूखदार सहयोगियों का पता लगाने के लिए पुलिस रिमांड में उनसे कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं।
कोलकाता नगर निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहा यह हंटर केवल महेश शर्मा तक सीमित नहीं है। हाल के दिनों में निगम के कई और पार्षदों पर भी कानून का शिकंजा कसा है, जिसमें वार्ड 36 के सचिन सिंह, वार्ड 106 के अरिजीत दास ठाकुर और वार्ड 123 के सुदीप पॉल्ले शामिल हैं। बैक-टू-बैक हुई इन हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियों ने बंगाल की सियासत में भूचाल ला दिया है, जहां विपक्ष इसे सत्ताधारी दल के संस्थागत भ्रष्टाचार का अंत बता रहा है, वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि ये सभी कार्रवाइयां पूरी तरह से निष्पक्ष और कानून के दायरे में रहकर की जा रही हैं।