वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
लाखों की रंगदारी और सिंडिकेट का आरोप
कोलकाता। कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 101 के कद्दावर तृणमूल पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। रंगदारी, सिंडिकेट राज, अवैध वसूली और दबंगई के संगीन आरोपों में घिरे बप्पादित्य को जब रविवार को अदालत में पेशी के लिए पाटुली थाने से बाहर निकाला गया, तो उन्हें स्थानीय जनता के प्रचंड आक्रोश का सामना करना पड़ा। थाने के बाहर भारी संख्या में जुटे नाराज लोगों ने पार्षद और उनके करीबी सहयोगी सौरभ घोष के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और उन पर अंडे फेंके। स्थिति इस कदर बेकाबू थी कि कुछ अंडे सीधे पुलिस के वाहन पर जा गिरे, जिसके बाद पुलिस ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए कड़े सुरक्षा घेरे में दोनों को वहां से निकाला। पार्षद की गिरफ्तारी के बाद इलाके के लोगों ने उनके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है और कई हैरान करने वाले खुलासे किए हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पाटुली और उसके आस-पास के इलाकों में बिना कट मनी दिए पत्ता भी नहीं हिलता था। किसी भी निर्माण कार्य के लिए प्रति क_ा जमीन के हिसाब से जबरन वसूली की जाती थी और भुगतान न करने पर काम रुकवा दिया जाता था। इसके साथ ही पाटुली के ही एक पीडि़त सेनगुप्ता परिवार ने शिकायत दर्ज कराई है कि अपनी ही खरीदी हुई जमीन पर निर्माण कार्य की प्रशासनिक बाधाएं दूर करने के एवज में पार्षद के करीबियों ने उनसे 14 लाख रुपये की मोटी रकम मांगी थी। पैसे देने से इनकार करने पर उन्हें अपनी ही जमीन का इस्तेमाल नहीं करने दिया गया।
बप्पादित्य के सिंडिकेट का प्रभाव सिर्फ उनके अपने वार्ड तक सीमित नहीं था, बल्कि पड़ोसी वार्ड संख्या 110 तक फैला हुआ था। लोगों के बीच पाटुली बी-ब्लॉक स्थित पार्षद के आलीशान बंगले को लेकर भी भारी चर्चा है, जिसे अवैध कमाई से खड़ा किया गया बताया जा रहा है। वहीं, बप्पादित्य के साथ गिरफ्तार हुए उनके गुर्गे सौरभ घोष पर एक बुजुर्ग दंपति ने आरोप लगाया है कि साल 2013 से उनके किराए के मकान पर अवैध कब्जा जमाए बैठे किरायेदारों को सौरभ का सीधा संरक्षण प्राप्त था, जिसके कारण वे न तो घर खाली करवा पा रहे थे और न ही उन्हें किराया मिल रहा था। फिलहाल पुलिस बप्पादित्य दासगुप्ता और सौरभ घोष के खिलाफ दर्ज सभी शिकायतों, वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड और दस्तावेजी सबूतों को खंगालने में जुटी है। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद कोलकाता की राजनीति में सिंडिकेट राज को लेकर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है।