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घिरे फरार तृणमूल पार्षद सुशांत घोष
कोलकाता। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के विवादित तृणमूल पार्षद सुशांत घोष की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले से ही पुलिस की गिरफ्त से बाहर और फरार चल रहे सुशांत घोष के खिलाफ अब फर्जी दस्तावेजों के जरिए फुटपाथ की दुकान बेचने और लाखों रुपये की ठगी करने का एक और गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में आनंदपुर थाने में सुशांत घोष सहित कुल पांच लोगों के खिलाफ जालसाजी और आपराधिक साजिश की नई एफआईआर दर्ज की गई है। इस नए खुलासे ने एक बार फिर स्थानीय स्तर पर फुटपाथ दुकानों के आवंटन में चल रहे राजनीतिक संरक्षण और संगठित भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी है।
आनंदपुर थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, यह पूरा मामला नवंबर 2022 का है। कसबा के राजडांगा स्कूल रोड निवासी एक पीडि़त व्यक्ति को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए दुकान की सख्त जरूरत थी। आरोप है कि इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए सुशांत घोष और उनके सिपहसालारों ने आनंदपुर रोड स्थित रूबी क्रॉसिंग के पास फुटपाथ पर सात फुट की एक दुकान दिलाने का झांसा दिया। पीडि़त का भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने कोलकाता नगर निगम का फर्जी ट्रेड लाइसेंस और कई जाली दस्तावेज भी दिखाए। इन कागजातों को असली मानकर पीडि़त ने आरोपियों को साढ़े तीन लाख रुपये सौंप दिए।
मगर पैसे ऐंठने के बाद आरोपियों का असली चेहरा सामने आ गया। पीडि़त को वादे के मुताबिक दुकान देने के बजाय दबाव और धमकी देकर महज चार फुट की एक छोटी दुकान की चाबी थमा दी गई, जिसका इस्तेमाल पहले रूबी मार्केट कमेटी द्वारा एम्बुलेंस रूम के तौर पर किया जाता था और उसका कोई वैध लाइसेंस भी नहीं था। पीडि़त का आरोप है कि सुशांत घोष के राजनीतिक रसूख और खौफ के कारण वह वर्षों तक शिकायत दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा सका लेकिन अब राज्य में प्रशासनिक माहौल बदलने के बाद उसने थाने पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। पुलिस ने जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच और आरोपियों की तलाश तेज कर दी है।