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हाईकोर्ट ने कहा 1 महीने में साफ करें बड़ाबाजार का अतिक्रमण
कोलकाता। हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण और जनहित में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्वी भारत के एकमात्र पारसी अग्नि मंदिर के जीर्णोद्धार और मरम्मत कार्य के रास्ते में आ रहे सभी रोड़ों को हटाने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कोलकाता नगर निगम (केएमसी), कोलकाता पुलिस और हेरिटेज कमेटी को सख्त निर्देश जारी करते हुए बड़ा बाजार के इजरा स्ट्रीट स्थित इस मंदिर के आसपास फैले तमाम अवैध कब्जों और अस्थायी दुकानों को एक महीने के भीतर हटाने को कहा है। न्यायमूर्ति अरिंदम मुखोपाध्याय की पीठ ने साफ किया कि इस ए-वन श्रेणी की हेरिटेज इमारत की सुरक्षा के लिए न सिर्फ मंदिर परिसर, बल्कि आसपास की सड़कों और फुटपाथों को भी पूरी तरह अतिक्रमणमुक्त करना होगा। साथ ही, प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में यहाँ दोबारा कोई अवैध कब्जा न जमा सके।
इस ऐतिहासिक पारसी मंदिर के जीर्णोद्धार की आवश्यकता तब महसूस हुई, जब वर्ष 2024 के अंत में इजरा स्ट्रीट स्थित इस परिसर में भीषण आग लगने के कारण भारी क्षति पहुंची थी। इसके बाद मंदिर ट्रस्ट ने इसके जीर्णोद्धार और पुरानी भव्यता को वापस लाने की योजना तैयार की, लेकिन मंदिर के चारों तरफ और दीवारों से सटकर लगी अवैध दुकानों व अतिक्रमण के कारण मरम्मत का काम शुरू ही नहीं हो सका। निर्माण सामग्री और श्रमिकों के आने-जाने का रास्ता पूरी तरह बंद होने के कारण आखिरकार थक-हारकर मंदिर ट्रस्ट को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
मामले की सुनवाई के दौरान वहां सालों से जमी जमाए बैठे कुछ स्थानीय दुकानदारों ने दावा किया कि वे दशकों से वहां कारोबार कर रहे हैं और उनके पास वैध दस्तावेज हैं। हालांकि, अदालत के समक्ष पेश की गई आधिकारिक रिपोर्ट ने इन दावों की हवा निकाल दी, जिसमें कहा गया कि 26 इजरा स्ट्रीट परिसर में मौजूद किसी भी व्यक्ति के पास वैध किरायेदारी या लाइसेंस से जुड़ा कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं मिला। अदालत ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह विवाद लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में अटका हुआ है, जिसके चलते इस अमूल्य विरासत का काम रुका पड़ा है।
हाईकोर्ट ने अब आर-पार का रुख अपनाते हुए संबंधित सभी सरकारी विभागों को संयुक्त सर्वेक्षण कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही पारसी चर्च स्ट्रीट और आसपास की पुरानी इमारतों की मौजूदा स्थिति का भी आकलन किया जाएगा। अदालत ने इस पूरी बेदखली और सर्वेक्षण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 15 जुलाई तक की अंतिम समय-सीमा तय कर दी है। हाल के दिनों में कोलकाता के विभिन्न हिस्सों में अतिक्रमण हटाओ अभियान पर अंतरिम रोक लगाने वाले हाईकोर्ट ने इस मामले में साफ कर दिया कि जब बात ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की हो, तो किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।