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सुप्रीम कोर्ट के फैसले की ढाल, तख्तापलट रोकने की कवायद

'टीएमसी एक ही पार्टी, बागी गुट को न मिले मान्यता'

14 Jun 2026

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की ढाल, तख्तापलट रोकने की कवायद

कोलकाता। तृणमूल में मचे भीषण घमासान और दिल्ली में हो रहे सांसदों के शक्ति प्रदर्शन के बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व लोकसभा में संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने जवाबी घेराबंदी तेज कर दी है। अभिषेक ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक बेहद महत्वपूर्ण तीन पन्नों का पत्र भेजकर दोटूक शब्दों में साफ किया है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस पूरी तरह से एक अखंड और अविभाज्य राजनीतिक दल है। 
उन्होंने स्पीकर से मांग की है कि संसद के भीतर किसी भी तरह के समानांतर या बागी गुट को किसी भी सूरत में अलग से मान्यता न दी जाए। यह पत्र ऐसे नाजुक वक्त पर भेजा गया है जब काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में असंतुष्ट सांसद सोमवार को अलग संसदीय ब्लॉक के दावे के साथ स्पीकर से मुलाकात करने की तैयारी कर रहे हैं।
रविवार को राज्यसभा सांसद सागरिका घोष और लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद ने अभिषेक बनर्जी के इस पत्र को खुद लोकसभा अध्यक्ष के आवास पर जाकर सौंपा। पत्र में अभिषेक बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा है कि तृणमूल ही एकमात्र वैधानिक और संवैधानिक राजनीतिक दल है और लोकसभा में मौजूद उसका संसदीय दल मूल संगठन का ही एक अभिन्न हिस्सा है। उनका सीधा तर्क है कि किसी भी पार्टी के सांसद केवल अपनी व्यक्तिगत इच्छा या महत्वाकांक्षा के चलते इस तरह का समानांतर समूह नहीं बना सकते और न ही अलग मान्यता का दावा ठोक सकते हैं। ऐसा करना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक मर्यादाओं और जनादेश का अपमान है।
इस पत्र की सबसे बड़ी रणनीतिक बात यह है कि अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों के चक्रव्यूह को तोडऩे के लिए कानूनी दांव चला है। उन्होंने पत्र में महाराष्ट्र सियासत से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसलों का विशेष रूप से हवाला दिया है। अभिषेक का तर्क है कि अदालत पहले ही यह तय कर चुकी है कि विधायी दल में इस प्रकार का विभाजन असंवैधानिक है और दल-बदल विरोधी कानून की मूल भावना के पूरी तरह विपरीत है। पत्र सौंपने के बाद सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी दहाड़ते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नजीर के बाद पार्टी को तोडऩे की यह साजिश किसी भी हाल में सफल नहीं होगी और संविधान के दायरे में इस बगावत का कोई कानूनी आधार ही नहीं है।
दूसरी तरफ, दिल्ली में सियासी पारा लगातार उबल रहा है। एक ओर जहां ममता खेमा इस कानूनी घेराबंदी में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली आवास पर तृणमूल के असंतुष्ट सांसदों की एक बेहद गोपनीय और बड़ी बैठक संपन्न हुई है। इस बैठक में शामिल हुए कई दिग्गज सांसदों की तस्वीरें भी अब खुलकर सामने आ चुकी हैं, जिससे यह साफ है कि बागी समूह पीछे हटने के मूड में नहीं है और वे लोकसभा में अपनी अलग पहचान और सांगठनिक मान्यता की मांग को लेकर आर-पार की रणनीति तैयार कर चुके हैं। तृणमूल के भीतर छिड़े इस ऐतिहासिक गृहयुद्ध के बीच अब सबकी नजरें सोमवार को होने वाली संभावित मुलाकातों और इस पर लोकसभा अध्यक्ष के आने वाले फैसले पर टिक गई हैं।

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