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तृणमूल के संकट के बीच हुमायूं का ममता को ऑफर

'मुझे अपनी साझेदारी में लें, रेजिनगर सीट भी छोडऩे को तैयार'

16 Jun 2026

तृणमूल के संकट के बीच हुमायूं का ममता को ऑफर

कोलकाता। बंगाल की लगातार बदलती राजनीति के बीच रेजिनगर के विधायक और आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर ने एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। राज्य में जारी सियासी उठापटक के बीच हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी के प्रति न सिर्फ अपना खुला समर्थन जताया है, बल्कि सहयोग की गहरी इच्छा भी जाहिर की है। उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आज ममता बनर्जी को उनकी बेहद जरूरत है और यदि वह चाहें तो उन्हें अपने साथ शेयरिंग यानी राजनीतिक साझेदारी में शामिल कर सकती हैं।
हुमायूं कबीर का दावा है कि तृणमूल इस समय अपने सबसे गंभीर राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रही है। उनके अनुसार, पार्टी के कई रसूखदार विधायक और सांसद नेतृत्व का साथ छोड़ चुके हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि लोकसभा में तृणमूल के कई सांसद अब दूसरे राजनीतिक खेमे की तरफ रुख कर चुके हैं, जिससे पार्टी की जमीन काफी कमजोर हुई है। कबीर ने कहा कि वे दिल से चाहते हैं कि ममता बनर्जी राजनीति में पूरी तरह सक्रिय रहें, क्योंकि उन्होंने बेहद लंबे और कड़े संघर्ष के बाद इस राजनीतिक मंच को तैयार किया था। ऐसे में अगर वह हाथ मिलाना चाहें, तो इसमें किसी भी पक्ष को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष ही हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी अलग पार्टी 'आम जनता उन्नयन पार्टीÓ बनाई और तृणमूल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। हालांकि, जमीन पर उन्हें कोई खास सियासी सफलता नहीं मिली। दिलचस्प बात यह है कि तृणमूल से अलग होने और तीखी आलोचना करने के बावजूद हुमायूं समय-समय पर ममता बनर्जी के प्रति अपना पुराना सम्मान दिखाते रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने बड़ा दिल दिखाते हुए प्रस्ताव दिया था कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो वह उनके लिए अपनी सुरक्षित रेजिनगर विधानसभा सीट छोडऩे को तैयार हैं, ताकि ममता वहां से दोबारा चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंच सकें। हुमायूं का मानना है कि रेजिनगर में उनका अच्छा-खासा जनाधार है, जिसके दम पर ममता बनर्जी वहां से बड़ी जीत हासिल कर सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषक उनके इस ताजा बयान को बंगाल की सियासत में आने वाले एक नए समीकरण के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

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