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शुभेंदु सरकार ला रही है खौफनाक कानून
कोलकाता। राज्य में हिंसा, सरकारी व निजी संपत्तियों को निशाना बनाने वाले उपद्रवियों और खाकी पर हाथ डालने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार अब तक का सबसे बड़ा और सख्त कानूनी चाबुक चलाने की तैयारी में है। राज्य में कानून-व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद करने और दंगाइयों के हौसले पस्त करने के लिए इसी सप्ताह एक बेहद कड़ा कानून लाया जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में फलता की हिंसक घटना के बाद साफ तौर पर चेतावनी दी थी कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री की इसी सख्त घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए राज्य का गृह विभाग पूरी मुस्तैदी से जुट गया है।
नवान्न के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आगामी सोमवार को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की अहम बैठक में गृह विभाग इस संबंध में दो अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़े विधेयकों को मंजूरी के लिए पेश करने जा रहा है। कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही इन्हें इसी बजट सत्र में विधानसभा के पटल पर रख दिया जाएगा।
प्रस्तावित विधायी बदलावों के तहत सरकार दोतरफा रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें पहला कदम वर्ष 1972 के ऐतिहासिक वेस्ट बंगाल मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर एक्ट में बड़ा संशोधन करना है, जबकि दूसरा पूरी तरह से एक नया और अभूतपूर्व कानून होगा, जिसे पब्लिक सेफ्टी कंट्रोल एंड एंटी सोशल एक्टिविटी बिल का नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में प्रशासन का मानना है कि बदलते दौर में पुराने पड़ चुके नियमों के सहारे आधुनिक असामाजिक तत्वों पर नकेल कसना मुमकिन नहीं है, इसलिए प्रशासन और पुलिस को असीमित व अतिरिक्त शक्तियां देना समय की मांग बन चुका है। वर्तमान कानून का दायरा मुख्य रूप से दंगा, आगजनी, लूटपाट और विस्फोटक पदार्थों के इस्तेमाल तक सीमित था, लेकिन अब इसमें संशोधन कर पुलिस को खुली छूट दी जाएगी ताकि संवेदनशील और हिंसक परिस्थितियों में मौके पर ही त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की जा सके और उपद्रवियों को संभलने का मौका न मिले।
इस नए कानून की सबसे बड़ी और मारक मार आर्थिक दंड के रूप में सामने आएगी, जिसने दंगाइयों की नींद उड़ा दी है। नए विधेयक के मसौदे में यह बेहद कड़ा प्रावधान जोड़ा गया है कि यदि किसी भी आंदोलन, प्रदर्शन या दंगे के दौरान किसी ने भी सरकारी या निजी संपत्ति को रत्ती भर भी नुकसान पहुंचाया, तो उसकी पाई-पाई की वसूली उसी उपद्रवी से की जाएगी। नुकसान का हर्जाना वसूलने के लिए प्रशासन को आरोपी की चल-अचल संपत्ति को कुर्क करने और उसे सरेबाजार बेचकर मुआवजा निकालने का पूरा अधिकार होगा। राज्य सरकार ने इस कानून को अचूक बनाने के लिए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों के कड़े कानूनों का गहन अध्ययन किया है। उत्तर प्रदेश का गैंगस्टर एक्ट और माफिया विरोधी कानून, महाराष्ट्र का मकोका और गुजरात का संगठित अपराध नियंत्रण कानून देश में अपनी सख्ती के लिए जाने जाते हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर तैयार हो रहे इस नए मसौदे में इन सभी राज्यों के सर्वश्रेष्ठ और सबसे कड़े प्रावधानों को शामिल किया जा रहा है, जिससे यह देश के सबसे असरदार कानूनों में से एक बन जाएगा।
सरकार इस नए कानून के जरिए सीधे तौर पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना चाहती है। पिछले कुछ समय में ऐसी कई दुस्साहसिक घटनाएं सामने आई थीं जहाँ असामाजिक तत्वों ने थानों पर हमला कर दिया था और पुलिसकर्मियों को जान बचाने के लिए छिपना पड़ा था, यहाँ तक कि केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी निशाना बनाया गया था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि वर्दी पर उठने वाले हर हाथ को कानूनन कुचल दिया जाएगा। गृह विभाग के सूत्रों का कहना है कि नए विधेयक में अपराध और असामाजिक गतिविधियों की परिभाषा को इतना व्यापक और सख्त किया जा रहा है कि कोई भी अपराधी बचकर निकल नहीं पाएगा। इस कानून के लागू होने के बाद राज्य में हिंसा और तोडफ़ोड़ करने वालों की आने वाली पीढिय़ां भी अपराध करने से पहले सौ बार सोचेंगी, क्योंकि एक बार संपत्ति की जब्ती शुरू हुई तो उपद्रवियों के पास सड़क पर आने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।