वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
आरोप लगाया गया है कि भीड़ द्वारा इन लोगों पर अंडे, स्याही और पत्थर फेंके गए हैं
कोलकाता। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अपने सांसदों, विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हिंसक हमलों, सार्वजनिक अपमान तथा अंडे फेंकने की घटनाओं को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है। पार्टी ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को गंभीर बताते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है।
यह मामला सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता सिरसान्या बनर्जी ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष उल्लेखित किया। अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि याचिका शुक्रवार को दायर की गई थी, लेकिन उस पर सुनवाई नहीं हो सकी। उन्होंने मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की।
खंडपीठ ने प्रस्तुतियों पर संज्ञान लेते हुए मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुनने पर सहमति जताई है।
याचिका में हाल की उन घटनाओं का उल्लेख किया गया है, जिनमें तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन, कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के अलावा विधायक कुणाल घोष तथा मदन मित्र पर कथित रूप से अंडे फेंके जाने और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हिंसा किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि पार्टी से जुड़े लोगों के खिलाफ लक्षित सार्वजनिक हिंसा, भीड़ द्वारा हमले, मानहानिकारक प्रचार और सार्वजनिक रूप से सुनवाई जैसी घटनाएं अत्यंत भयावह, चिंताजनक और पीड़ादायक हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन घटनाओं के माध्यम से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
याचिका में कहा गया है कि यह कार्यवाही कानून के शासन, संवैधानिक स्वतंत्रताओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान के भाग-3 के अंतर्गत प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए शुरू की गई है। पार्टी का आरोप है कि राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसा, दबाव और उत्पीड़न की घटनाओं से इन अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है।
तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति अत्यंत चिंताजनक और परेशान करने वाली है तथा पार्टी के कार्यकर्ता और सहयोगी सुरक्षित नहीं हैं।
याचिका के अनुसार, पार्टी से जुड़े लोगों को बार-बार सार्वजनिक अपमान और शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। आरोप लगाया गया है कि भीड़ द्वारा इन लोगों पर अंडे, स्याही और पत्थर फेंके गए हैं।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ गंभीर मामलों में उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को कथित रूप से अवैध रूप से रोका गया, उनके साथ मारपीट की गई और भीड़ द्वारा सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। याचिका में कहा गया है कि कुछ लोगों को दबाव में घुमाया गया और उग्र भीड़ ने स्वयं को न्यायाधीश, जूरी और दंड देने वाला मानते हुए उनके साथ गंभीर शारीरिक हिंसा की।