Please wait
फीफा विश्व कप 2026: ब्राजील के स्टार खिलाड़ी नेमार जूनियर ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से लिया संन्यास Sudhir wins historic बारुईपुर नाबालिग हत्याकांड : 6 सदस्यीय विशेष जांच दल गठित, एक और आरोपित गिरफ्तार Sudhir wins historic शादी के बंधन में बंधे आमिर खान और गौरी स्प्रैट Sudhir wins historic बंगाल में भारी बारिश का अलर्ट, तटीय जिलों में प्रशासन सतर्क Sudhir wins historic तृणमूल प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद चंद्रिमा भट्टाचार्य ने ऋतब्रत बनर्जी गुट के नेताओं से की मुलाकात, अटकलें तेज Sudhir wins historic वैभव सूर्यवंशी ने डेब्यू करते ही रचा इतिहास, तोड़ा सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना महारिकॉर्ड Sudhir wins historic राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कठोर दंडः संघ Sudhir wins historic डायमंड हार्बर में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नया मामला, ‘सेवाश्रय’ शिविर जांच के घेरे में Sudhir wins historic विपक्षी विधायकों को मिलेगा समान सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकार, विधानसभा में बोले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी Sudhir wins historic तृणमूल के तीन बैंक खातों पर रोक मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, बैंक से हलफनामा और पुलिस से जांच रिपोर्ट तलब Sudhir wins historic

अब रोज लगेगा 'जनता दरबार'

ममता को अभिषेक संग न बैठने की सलाह

23 Jun 2026

अब रोज लगेगा 'जनता दरबार'

कोलकाता। विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करने के बाद तृणमूल कांग्रेस अब अपने संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद में जुट गई है। चुनावी रणनीतिकारों और कॉरपोरेट सलाहकार संस्थाओं (आई-पैक) पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय पार्टी ने अब पुराने ढर्रे पर लौटने का मन बनाया है। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी नियमित रूप से 'जनता दरबार' लगाकर सीधे आम लोगों की समस्याएं सुनेंगे। कालीघाट सूत्रों के मुताबिक, नेतृत्व को यह अहसास हो चुका है कि जमीनी स्तर पर जनता और कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क टूटने की वजह से ही पार्टी में असंतोष और विद्रोह पनपा, जिसे अब 2019 से पहले वाली संगठनात्मक शैली अपनाकर दुरुस्त किया जाएगा। चुनावी पराजय के बाद तृणमूल के सामने अपने कुनबे को संभालने की सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि कई विधायक और सांसद पहले ही पाला बदल चुके हैं। डैमेज कंट्रोल के तहत पार्टी ने अब नए जुडऩे वाले नेताओं के नाम गुप्त रखने का फैसला किया है ताकि उन पर राजनीतिक दबाव न बनाया जा सके। साथ ही ममता और अभिषेक को विभिन्न पदों से हटाए जाने के खिलाफ फिलहाल कोर्ट न जाने की रणनीति बनाई गई है।
इस बीच, तृणमूल के इस नए कदम पर सियासी घमासान भी छिड़ गया है। भाजपा प्रवक्ता देवजीत मुखोपाध्याय ने इसे 15 साल की नाकामी को छिपाने का महज राजनीतिक दिखावा करार दिया है, तो माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने तंज कसा कि खोया जनाधार पाने के लिए यह कोशिश काफी देर से की जा रही है। हालांकि, सबसे तीखा हमला तृणमूल के पूर्व प्रवक्ता ऋजू बसु की तरफ से आया। उन्होंने ममता बनर्जी को दोटूक सलाह देते हुए कहा कि यदि वे जनता दरबार लगाना ही चाहती हैं, तो उन्हें अभिषेक बनर्जी के साथ मंच साझा नहीं करना चाहिए। ऋजू का दावा है कि जनता के बीच अभिषेक को लेकर भारी नाराजगी है और दरबार में आने वाले लोग इसका खुलकर इजहार कर सकते हैं। बहरहाल, अस्तित्व की इस लड़ाई में जनता दरबार का यह दांव तृणमूल को कितना संजीवनी दे पाता है, इस पर राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें टिकी हैं।

Comments

No comments to show. Log in to add some!

Other Relevant Stories


अब रोज लगेगा 'जनता दरबार'
ममता को अभिषेक संग न बैठने की सलाह





Download The Taaza Tv App Now to Stay Updated on the Latest News!


play store download
app store download
app img


Breaking News