तारातला में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही, 3 मजदूरों की मौत, 18 को बचाया गया
मुख्यमंत्री ने तब सदन में हुंकार भरते हुए कहा था कि काली को पकड़ते ही इस पूरे भ्रष्टाचार का घड़ा फूट जाएगा और पूरा मामला जनता के सामने आ जाएगा
कोलकाता। गोदाम ढहने के भीषण हादसे के मामले में गिरफ्तार केएमसी के प्रभावशाली अधिकारी कालीचरण बनर्जी को अलीपुर अदालत ने आगामी 4 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अदालत में बेहद सनसनीखेज दावा किया है कि कालीचरण अकेले इस खेल में शामिल नहीं थे, बल्कि कथित रूप से एक बड़े और संगठित सिंडिकेट के जरिए मोटी रिश्वत लेकर त्रुटिपूर्ण व तकनीकी खामियों से भरी भवन योजनाओं को धड़ल्ले से मंजूरी दी जाती थी। अब जांचकर्ता इस बात की तह तक जाने में जुटे हैं कि इस काली कमाई के खेल के पीछे किन-किन बड़े और प्रभावशाली रसूखदारों का हाथ था। सरकारी वकील सौरिन घोषाल ने अदालत में पुरजोर दलील दी कि कालीचरण कथित रूप से नियमों को ताक पर रखकर उन अवैध नक्शों को भी हरी झंडी दिलाते थे, जो सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह फेल थे। आरोप यह भी है कि इन त्रुटिपूर्ण नक्शों को पास कराने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाली एक पूरी टीम पर्दे के पीछे सक्रिय थी, जिसके अन्य सदस्यों और उन्हें राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण देने वाले चेहरों की तलाश एसआईटी सरगर्मी से कर रही है। सरकारी पक्ष की इस दलील को स्वीकार करते हुए कि आरोपी के बाहर रहने से जांच प्रभावित हो सकती है, अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर उसे पुलिस रिमांड पर सौंप दिया।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में दलील दी कि कालीचरण को उनके घर से गिरफ्तार किया गया है और उनके खिलाफ कोई ठोस या प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है, क्योंकि भवन योजनाओं से जुड़े तमाम दस्तावेज पहले से ही नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, इसलिए उन्हें हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों की तीखी जिरह सुनने के बाद आरोपी की पुलिस हिरासत मंजूर कर ली। गौरतलब है कि इस भयावह तारातला हादसे पर हाल ही में विधानसभा में कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सीधे कालीचरण का नाम लिया था। मुख्यमंत्री ने गंभीर आरोप लगाया था कि नगर निगम में कालीचरण की यह संवेदनशील नियुक्ति सीधे कैमैक स्ट्रीट के इशारे और निर्देश पर हुई थी और कोलकाता में अवैध भवन योजनाओं को स्वीकृति दिलाने में उनकी केंद्रीय भूमिका थी। मुख्यमंत्री ने तब सदन में हुंकार भरते हुए कहा था कि काली को पकड़ते ही इस पूरे भ्रष्टाचार का घड़ा फूट जाएगा और पूरा मामला जनता के सामने आ जाएगा। फिलहाल एसआईटी की पैनी नजर इस बात पर है कि प्रशासनिक रूप से इतने कुशल अधिकारी ने आखिर किन बड़े आकाओं के इशारे पर मौत की इन इमारतों के नक्शे पास किए और इस संगठित रिश्वत नेटवर्क का असली सरगना कौन है।