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दीदी का धरना छोड़ अचानक विधानसभा पहुंचे डेरेक-कुणाल

मेज पर पत्र पटक बनाया वीडियो, नया सियासी ड्रामा

02 Jun 2026

दीदी का धरना छोड़ अचानक विधानसभा पहुंचे डेरेक-कुणाल

कोलकाता। तृणमूल के भीतर मचे घमासान और बगावत की अटकलों के बीच मंगलवार को विधानसभा परिसर में एक नया सियासी ड्रामा देखने को मिला। एक तरफ जहां पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी रानी रासमणि एवेन्यू में पार्टी के धरने का नेतृत्व कर रही थीं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के कद्दावर नेता डेरेक ओ ब्रायन, कुणाल घोष और असीमा पात्रा धरना बीच में ही छोड़कर अचानक विधानसभा पहुंच गए। इस चौंकाने वाले कदम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में अटकलों के बाजार को और गर्म कर दिया है कि आखिर इस संकट के बीच पार्टी को इतनी हड़बड़ी में विधानसभा क्यों भागना पड़ा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी हलचल का कनेक्शन नेता प्रतिपक्ष के चयन और कथित हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा मामले से जुड़े नए कानूनी दांवपेंच से है। तृणमूल अब संसदीय नियमों के आधार पर खुद को मजबूत करने की रणनीति बना रही है। 
पार्टी का तर्क है कि नेता प्रतिपक्ष के चयन के लिए पार्टी नेतृत्व का पत्र ही अंतिम और वैध होता है, इसके लिए सभी विधायकों के दस्तखत जरूरी नहीं हैं। इसी सिलसिले में कुणाल घोष और असीमा पात्रा विधानसभा अध्यक्ष को एक नया पत्र सौंपने पहुंचे थे ताकि भविष्य में किसी भी संवैधानिक संकट से बचा जा सके। 
हालांकि, विधानसभा पहुंचने पर अध्यक्ष मौजूद नहीं थे और सचिवालय ने अनुमति के बिना पत्र लेने से साफ मना कर दिया। इसके बाद नाराज कुणाल घोष ने वह पत्र सचिव की मेज पर ही छोड़ दिया और बकायदा उसका वीडियो रिकॉर्ड करके बाहर आ गए। कुणाल ने पत्र की कूटनीतिक बातों को छिपाते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी विधायकों के पत्र न लेकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का गला घोंटा जा रहा है। 
दूसरी ओर, सरकार में मंत्री और भाजपा नेता तापस रॉय ने पलटवार करते हुए कहा कि मामला पहले से ही सीआईडी जांच के दायरे में है, इसलिए अधिकारियों ने नया पत्र लेने से परहेज किया होगा। इस घटना ने साफ कर दिया है कि तृणमूल अब इस अंदरूनी बगावत से निपटने के लिए राजनीतिक के साथ-साथ कानूनी मोर्चे पर भी आर-पार की लड़ाई के मूड में है।

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