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तृणमूल कांग्रेस में नेतृत्व विवाद तेज, शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने पेश किए विधायकों के हस्ताक्षर

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद के बीच वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने उन विधायकों के हस्ताक्षर सार्वजनिक किए हैं, जिन्होंने उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता चुने जाने के समर्थन में सहमति दी थी। यह मामला अब राजनीतिक खींचतान का नया केंद्र बन गया है।

06 Jun 2026

तृणमूल कांग्रेस में नेतृत्व विवाद तेज, शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने पेश किए विधायकों के हस्ताक्षर

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद के बीच वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने उन विधायकों के हस्ताक्षर सार्वजनिक किए हैं, जिन्होंने उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता चुने जाने के समर्थन में सहमति दी थी। यह मामला अब राजनीतिक खींचतान का नया केंद्र बन गया है।

सूत्रों के अनुसार, 30बी हरिश चटर्जी स्ट्रीट में छह जून की शाम आयोजित बैठक में कुल 67 विधानसभा सदस्य मौजूद थे। शोभनदेव चट्टोपाध्याय की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज़ में सभी उपस्थित सदस्यों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। इनमें कुछ ने हिंदी और कुछ ने अंग्रेज़ी में हस्ताक्षर किए हैं, साथ ही कई सदस्यों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के नाम और तारीख भी अंकित किए हैं। कुछ नाम बड़े अक्षरों में लिखे गए हैं, जिनमें महेशतला के शुभाशिष दास, बोलपुर के चंद्रनाथ सिन्हा, खड़गपुर के दीनन राय और कैनिंग पूर्व के बहारुल इस्लाम शामिल बताए जा रहे हैं।

दस्तावेज़ के शीर्षक में लिखा गया है कि यह बैठक तृणमूल कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक के चयन से संबंधित है। छह जून की बैठक के विवरण में यह भी दर्ज है कि बैठक की अध्यक्षता फिरहाद हकीम ने की थी। उनके नाम का प्रस्ताव अरूप राय ने रखा और चंद्रनाथ सिन्हा ने उसका समर्थन किया। वहीं, शोभनदेव चट्टोपाध्याय को दल का नेता बनाने का प्रस्ताव मदन मित्रा ने रखा, जिसे सभी उपस्थित सदस्यों ने समर्थन दिया।

दस्तावेज़ में यह भी दावा किया गया है कि बैठक में उपस्थित न रहने वाले कुछ विधायकों ने भी अपने समर्थन की सहमति दी थी। वहीं, 19 तारीख की एक अन्य बैठक में 59 विधायकों के हस्ताक्षर दर्ज होने की बात भी सामने आई है।

इस पूरे मामले में आरोप लगाया गया है कि विधानसभा अध्यक्ष को प्रस्तुत कुछ दस्तावेजों में हस्ताक्षर जाली हो सकते हैं। इस संबंध में उलुबेरिया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और एंटाली के विधायक सन्दीपन साहा ने विधानसभा में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने जांच का जिम्मा राज्य अपराध जांच विभाग को सौंप दिया है। जांच एजेंसी ने अब तक चार विधायकों के हस्तलेख के नमूने भी एकत्र किए हैं।

इसी बीच दोनों शिकायतकर्ताओं को तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया है। विवाद तब और बढ़ गया जब 59 विधायकों के समर्थन का एक और पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाए जाने की बात कही गई थी। इसके परिणामस्वरूप शोभनदेव चट्टोपाध्याय के स्थान पर ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता घोषित किए जाने की बात सामने आई है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि जांच जारी है, इसलिए वे इस पर अधिक टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा दस्तावेज़ों की जांच और विधायकों के मोबाइल टावर लोकेशन की जांच से सच्चाई सामने आ सकती है।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के एक असंतुष्ट विधायक ने दावा किया कि 19 तारीख की बैठक में दो अलग-अलग हस्ताक्षर कराए गए थे, एक उपस्थिति के लिए और दूसरा समर्थन पत्र के लिए।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद और नेतृत्व को लेकर विवाद और गहरा गया है।
 

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