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फिरहाद हकीम के इस्तीफे की गुत्थी सुलझायेगी माला राय 

19 जून को विशेष अधिवेशन, 'पुरानी तृणमूल' की अग्निपरीक्षा

04 Jun 2026

फिरहाद हकीम के इस्तीफे की गुत्थी सुलझायेगी माला राय 

कोलकाता। कोलकाता नगर निगम के मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे को लेकर पिछले 24 घंटों से जारी हाई-प्रोफाइल राजनीतिक ड्रामे और अटकलबाजी पर आखिरकार निगम की चेयरपर्सन माला राय ने पर्दा गिरा दिया है। गुरुवार को नगर निगम मुख्यालय में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में माला राय ने पूरी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्हें अब तक मेयर फिरहाद हकीम की ओर से कोई भी आधिकारिक त्यागपत्र प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि मेयर के पद छोडऩे की खबरों का फिलहाल कोई जमीनी या आधिकारिक आधार नहीं है। 
माला राय ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मेयर ने मुझे ऐसा कोई पत्र नहीं भेजा है। नगर निगम के नियमों के तहत यदि ऐसा कोई घटनाक्रम होता है या इस्तीफा आता है, तो इसकी जानकारी तुरंत और पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक की जाएगी। दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत बुधवार को राज्य सचिवालय नवान्न में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद हुई थी, जब तृणमूल के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने दावा कर दिया था कि फिरहाद हकीम ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समक्ष मेयर पद से मुक्त होने की इच्छा जताई है और मुख्यमंत्री ने भी इसे स्वीकार कर लिया है। हालांकि, कुछ ही समय बाद फिरहाद हकीम ने खुद सामने आकर इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने इस्तीफे को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं किया है।  
इस सियासी घमासान के बीच, चेयरपर्सन माला राय ने नगर निगम के आगामी विशेष अधिवेशन को लेकर भी एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक घोषणा की। उन्होंने 22 मई को हुए अभूतपूर्व गतिरोध को याद दिलाते हुए बताया कि उस दिन प्रस्तावित निगम सदन की बैठक को अचानक रद्द कर दिया गया था, जिसकी भनक चेयरपर्सन कार्यालय तक को नहीं लगने दी गई थी। माला राय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हम उस समय पूरी तरह अंधेरे में थे। इस प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ हमने 29 मई को कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच का रुख किया था। 3 जून को अदालत में इस मामले की विस्तृत सुनवाई हुई। अब माननीय अदालत के स्पष्ट निर्देशों का पालन करते हुए आगामी 19 जून को दोपहर 2 बजे कोलकाता नगर निगम का विशेष अधिवेशन बुलाया गया है। इस संबंध में निगम सचिव को बैठक बुलाने का आधिकारिक पत्र जारी किया जा रहा है और अदालत को भी इस फैसले से अवगत कराया जाएगा।
दूसरी तरफ, राज्य में बदले राजनीतिक परिदृश्य के बीच नगर निगम की इस बैठक को बुलाने के फैसले का मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने पुरजोर स्वागत किया है। भाजपा की वरिष्ठ पार्षद मीना देवी पुरोहित ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निगम सदन की नियमित बैठक होना बेहद जरूरी है ताकि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि नागरिक समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठा सकें। हालांकि, उन्होंने एक मांग रखते हुए कहा कि पिछली बार हमें बैठक से दूर रखा गया था। इस बार अधिवेशन बुलाना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन हमारी स्पष्ट मांग है कि यह बैठक किसी अनौपचारिक क्लब रूम में न होकर मुख्य परिषद कक्ष की मर्यादा के भीतर ही आयोजित की जानी चाहिए।
बहरहाल, एक ओर जहां राज्य की सत्ताधारी पार्टी के भीतर आंतरिक खींचतान मची हुई है, वहीं दूसरी ओर 19 जून को होने वाला यह निगम अधिवेशन अब राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक के जरिए न केवल कोलकाता नगर निगम में फिरहाद हकीम के राजनीतिक भविष्य का फैसला होगा, बल्कि केएमसी के प्रशासनिक और लोकतांत्रिक ढांचे की अगली दिशा भी तय होगी। 

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