विपक्ष के हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित
5 तारीख को पद छोड़ते तो दीदी को यह दिन न देखना पड़ता
कोलकाता। तृणमूल की बागी सांसद शताब्दी राय ने अभिषेक बनर्जी के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने बागियों की वापसी पर एक घंटे के भीतर इस्तीफा देने की बात कही थी। शताब्दी राय ने इस पेशकश को बहुत देर से उठाया गया कदम बताते हुए कहा कि यदि चुनाव परिणाम आने के अगले दिन यानी 5 तारीख को ही अभिषेक ने अपना इस्तीफा दे दिया होता, तो आज पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस तरह के राजनीतिक संकट और पार्टी में बिखराव का सामना नहीं करना पड़ता। उनका कहना था कि हार-जीत राजनीति का हिस्सा है, लेकिन ममता बनर्जी जैसी कद्दावर नेत्री की पार्टी का इस तरह टूट जाना बेहद दुखद है और अभिषेक को यह जिम्मेदारी बहुत पहले समझनी चाहिए थी।
दरअसल, इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों और विधायकों के सामने एक सार्वजनिक प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा था कि अगर सभी बागी नेता वापस पार्टी में लौट आते हैं, तो वह महज एक घंटे में अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके साथ ही अभिषेक ने बागी नेताओं पर पलटवार करते हुए कहा था कि यदि चुनावी हार की जिम्मेदारी उन पर डाली जा रही है, तो 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली 29 सीटों की जीत का श्रेय भी उन्हें ही मिलना चाहिए। उन्होंने बागियों पर भाजपा के साथ समझौता करने और केंद्रीय एजेंसियों के दबाव में आकर तृणमूल कांग्रेस को तोडऩे का गंभीर आरोप भी लगाया था।
अभिषेक बनर्जी के इस बयान के बाद बागी खेमे में हलचल तेज है, लेकिन नेताओं के रुख में कोई नरमी नहीं दिख रही है। एनसीपीआई में शामिल हो चुकीं जादवपुर की सांसद सायनी घोष ने जहां इस पूरे घटनाक्रम पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से साफ परहेज किया, वहीं वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने सख्त रुख अपनाया।
सुदीप बंद्योपाध्याय ने स्पष्ट किया कि किसी भी सांसद या विधायक का किस दल में रहना है या कहां लौटना है, यह पूरी तरह से उसका व्यक्तिगत और लोकतांत्रिक निर्णय होता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के सार्वजनिक प्रस्तावों या बयानों के जरिए किसी भी नेता पर कोई दबाव नहीं बनाया जा सकता है।