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ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद रहे जावेद खान के बागी सुर

'जिस तृणमूल भवन में बैठे हैं नेता, वह जमीन भी मेरे परिवार ने दान की थी'

05 Jun 2026

ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद रहे जावेद खान के बागी सुर

कोलकाता। तृणमूल के भीतर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। बगावत की इस धधकती आग में अब एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। करीब तीन दशक तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी रहे पूर्व मंत्री जावेद खान ने अब खुलकर विद्रोह का झंडा बुलंद कर दिया है। शुक्रवार को विद्रोही गुट के अगुआ ऋतब्रत बनर्जी समर्थक विधायकों की बैठक में शामिल होकर उन्होंने न सिर्फ पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, बल्कि एक चौंकाने वाला दावा भी किया। जावेद खान ने कहा कि आज जिस तृणमूल भवन से पूरी पार्टी संचालित होती है, उस मुख्यालय की जमीन भी उनके परिवार की थी, जिसे उन्होंने दल को दान में दिया था। उन्होंने साफ किया कि वे प्रतिशोध की राजनीति में विश्वास नहीं करते, इसलिए अपनी दान की हुई जमीन कभी वापस नहीं मांगेंगे।
विरोधी खेमे द्वारा अपनी संपत्ति को लेकर घेरे जाने पर पलटवार करते हुए जावेद खान ने कहा कि उनके खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि उनकी अधिकांश संपत्तियां पैतृक हैं। गौरतलब है कि जावेद खान का तृणमूल से नाता बेहद पुराना है। वे कोलकाता नगर निगम में पार्षद और नेता प्रतिपक्ष रहने के अलावा वर्ष 2006 से 2024 तक बालीगंज और कसबा से लगातार विधायक रहे और शुभेंदु सरकार में आपदा प्रबंधन मंत्री की अहम जिम्मेदारी संभाली। हालिया चुनाव में भी ममता बनर्जी ने उन पर भरोसा जताते हुए अपने भवानीपुर क्षेत्र के वार्ड नंबर 63 की कमान सौंपी थी, लेकिन चुनाव नतीजों के बाद वे बागी धड़े में शामिल हो गए।
पार्टी नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि तृणमूल के भीतर अब आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह से दम तोड़ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के अंदर वरिष्ठ नेताओं की राय को लगातार नजरअंदाज किया गया और कोई किसी की बात सुनने वाला नहीं बचा था। इसी तानाशाही रवैये के कारण आज अधिकांश लोग असंतुष्ट हैं और इसके लिए पूरी तरह शीर्ष नेतृत्व ही जिम्मेदार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जावेद खान जैसे कद्दावर और अल्पसंख्यक समुदाय के बड़े जनाधार वाले नेता का इस तरह खुलकर बगावत पर उतर आना संकट में घिरी तृणमूल कांग्रेस के लिए एक और घातक झटका है।

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