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सुकांत ने कहा कि उनकी शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात नहीं हुई। यही बात पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष भी कह रहे हैं।
कोलकाता। बीजेपी का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन खत्म हो गया है। लेकिन शनिवार या रविवार को एक बार भी बंगाल विपक्ष के नेता सुभेंदु अधिकारी उस सत्र में मौजूद नहीं थे। यह बात अधिवेशन में मौजूद बंगाल के प्रतिनिधियों ने कही। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार को शनिवार सुबह कोलकाता के अस्पताल से छुट्टी मिल गई। इसके बाद वह दोपहर की फ्लाइट से दिल्ली गए और शाम को भारत मंडपम में आयोजित सत्र में शामिल हुए। रविवार को वह पूरे समय वहीं थे। हालांकि, सुकांत ने कहा कि उनकी शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात नहीं हुई। यही बात पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष भी कह रहे हैं। दिलीप को फोन किया गया तो उन्होंने कहा, मैं दो दिनों तक पूरे समय वहां था। लेकिन मैं उनसे नहीं मिला हूं।
कई विधायकों के मुंह से यही बात सुनने को मिली है। इस सत्र में राज्य के सभी सांसदों, विधायकों को शामिल होना था। हालांकि, बंगाल के तीन विधायकों ने निजी या शारीरिक कारणों से पार्टी को इसकी जानकारी नहीं दी। विपक्षी नेता ने पार्टी और मीडिया को बताया कि वह शनिवार सुबह ही दिल्ली पहुंचेंगे। लेकिन वह दिल्ली गये ही नहीं। वह राज्य में थे। बीजेपी के कई नेता कहते हैं। हालांकि, जब सार्वजनिक टिप्पणियों की बात आती है, तो हर कोई केवल यही कह रहा है कि, वे सत्र में मुझसे नहीं मिले। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, शुभेंदु का रविवार को दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में बंगाल के राजनीतिक हालात पर बोलना सही होता। । लेकिन उनके उपस्थित नहीं रहने के कारण अंतिम समय में उनकी जिम्मेदारी विधायक एवं प्रदेश महासचिव अग्निमित्रा पलक को दी गयी। अग्निमित्र ने बताया कि बंगाल के निवर्तमान केंद्रीय नेता सुनील बंसल ने उनसे राज्य की राजनीतिक स्थिति के बारे में बात करने के लिए कहा। वहीं, शुभेंदु को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में अग्निमित्र ने कहा, मैं उनसे नहीं मिली हूं।
लेकिन, शुभेंदु दिल्ली गए ही नहीं? क्या वे दिल्ली गए लेकिन सत्र में शामिल नहीं हुए? बीजेपी में ऐसे कई सवाल हैं। कुछ लोगों का कहना है कि वह सत्र में शामिल नहीं हो सके क्योंकि हाल ही में संदेशखाली जाते समय उनके पैर में चोट लग गई थी। सत्र में भाग लेने वाले शुवेंदु के एक अन्य करीबी विधायक ने कहा, विपक्ष के नेता आखिरी मिनट के फैसले पर दिल्ली नहीं आए। वह हाल ही में कलकत्ता हाई कोर्ट में केंद्र के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल बिलबादल भट्टाचार्य को हटाए जाने से नाखुश हैं। नेता ने यह भी दावा किया कि शुवेंदु ने केंद्रीय नेतृत्व को मामले की जानकारी दी थी। उन्होंने यह भी कहा, कई कोशिशों के बाद भी शनिवार से उनका शुभेंदु से संपर्क नहीं हो सका।
बीजेपी की परंपरा के मुताबिक उनका राष्ट्रीय अधिवेशन हर पांच साल में होता है। इससे पहले पिछले लोकसभा चुनाव से पहले जनवरी 2019 में दिल्ली में सम्मेलन हुआ था। तब शुभेंदु बीजेपी में शामिल नहीं हुए थे। भाजपा में शामिल होने के बाद से यह पार्टी के सबसे बड़े सत्र में भाग लेने का उनका मौका था। शनिवार को सत्र की शुरुआत पार्टी अध्यक्ष जेपी नोडा के भाषण से हुई। मोदी के भाषण के बाद रविवार खत्म हो गया। रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बात की। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को संदेशखाली मुद्दे का जिस्र5 किया।
शाह के भाषण में बंगाल पर आतंकवाद और भ्रष्टाचार का केंद्र होने का भी आरोप लगाया। अग्निमित्र ने देश के आठ हजार से अधिक प्रतिनिधियों के सामने यही बात कही। इस अधिवेशन में राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए बंगाल से सात लोगों को आमंत्रित किया गया था। इसके अलावा नेशनल असेंबली के सदस्य भी हैं। इनमें से 42 बंगाल के हैं। राज्य के 16 लोकसभा सांसदों और एकमात्र राज्यसभा सांसद अनंत राय को मेल मिला। सुकान्त, शुभेंदु, दिलीप को कई पदों पर रहने के कारण बुलावा आया। इस सत्र में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर राहुल सिंह शामिल हुए लेकिन तथागत राय नहीं गये। शुवेंदु विपक्ष के नेता के तौर पर राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्य हैं। लोकसभा चुनाव सामने है तो जिला अध्यक्षों को भी फोन आया। मोर्चा और शाखा संगठनों के अलावा राज्य के 42 लोकसभा क्षेत्रों के प्रभारियों को भी बुलाया गया था। राज्य भाजपा नेताओं ने कहा कि हालांकि शुवेंदु सत्र में शामिल नहीं हुए, लेकिन बंगाल की उपस्थिति काफी अच्छी थी।