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कल विद्यापति ब्रिज का परिदर्शन करेगी केएमसी और केएमडीए
कोलकाता। कोलकाता में सबसे महत्वपूर्ण फ्लाईओवरों में से एक सियालदह स्टेशन के पास स्थित विद्यापति ब्रिज है जो सियालदह फ्लाईओवर के नाम से मशहूर है। शदियों से सीना ताने खड़ा ये ब्रिज अब उम्र के बोझ से जर्जर हो चुका है। हाल ही में सियालदह फ्लाईओवर की स्वास्थ्य परीक्षण रिपोर्ट में कई नकारात्मक बातें सामने आई हैं। इसलिए अब इस फ्लाईओवर में कई महत्वपूर्ण सुधार की जरूरत है। लेकिन सियालदह फ्लाईओवर के नीचे वृहत्तम बाजार होने के कारण फ्लाईओवर के मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। चूंकि किसी भी बड़े हादसे से बचने के लिये इस फ्लाईओवर का काम बेहद जूरी हैं ऐसे में अब कोलकाता नगर निमग (केएमसी) और कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (केएमडीए) संयुक्त कार्रवाई करने जा रही है।
केएमडीए और केएमसी मंगलवार को सियालदह फ्लाईओवर का निरक्षण करने जा रही हैं जिसमें बाजार संगठन के सदस्यों को भी शामिल किया जायेगा। केएमडीए सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को निरक्षण के दौरान समस्या का समाधान कर सियालदह फ्लाईओवर के काम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, बाजार संगठन, केएमडीए, केएमसी के शीर्ष अधिकारी क्षेत्र के पार्षदों के साथ अगले मंगलवार को सियालदह इलाके का दौरा करेंगे।
केएमडीए के अधिकारियों का मानना है कि विद्यापति सेतु का जीर्णोद्धार बहुत पहले हो जाना चाहिए था। लेकिन, पुल के नीचे बाजार होने के कारण योजना को बार-बार पीछे धकेलना पड़ता था। फिलहाल उस बाजार में करीब एक हजार दुकानें हैं। नवीनीकरण का काम शुरू होने पर उन सभी दुकानों को स्थानांतरित करना होगा। लेकिन अगर रेनोवेशन के दौरान दुकानें लंबे समय तक बंद रहेंगी तो दुकान मालिकों और कर्मचारियों को दिक्कत होगी। इसीलिए इतने लंबे समय तक मरम्मत का काम नहीं हो सकता है। बहरहाल सियालदह फ्लाईओवर की जो स्थिति है, उसमें जीर्णोद्धार का काम तेजी से शुरू होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता हैं तो अधिकारियों को डर है कि सितंबर 2018 में माझेरहाट ब्रिज के ढहने जैसी घटना एक बार फिर हो सकती हैं। हालांकि माघेरहाट ब्रिज के मामले में इतनी जानमाल की हानि नहीं हुई है, लेकिन सियालदह फ्लाईओवर में आपदा आने पर जानमाल का काफी नुकसान होगा। क्योंकि बाजार के अंदर की सड़क का इस्तेमाल कई लोग आवागमन के तौर पर करते हैं। इसके अलावा सियालदह स्टेशन जाने वाले कई लोग सियालदह फ्लाईओवर के नीचे से होकर गुजरते है। इसलिए प्रशासन सियालदह फ्लाईओवर जीर्णोद्धार के मामले में कोई भी जोखिम लेने से कतरा रही है। फिलहाल तय हुआ है कि रेनोवेशन के काम पर करीब 9 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
सियालदह फ्लाईओवर के प्रत्येक पिलर को लोहे के पिंजरे के साथ कंक्रीट की दीवार से कवर किया जाएगा। ताकि फ्लाईओवर के खंभे मजबूत हो। इसके अलावा भी सियालदह फ्लाईओवर कई हिस्सों को तोडऩे और ठीक करने की जरूरत है। पुल के चार लेन की रेलिंग का नवीनीकरण किया जाएगा। करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से पिच लाइनिंग हटाकर नई सड़क बनाई जाएगी। माझेरहाट दुर्घटना ने राज्य प्रशासन को हिलाकर रख दिया था। इसके बाद राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण फ्लाईओवर, पुलों की स्वास्थ्य जांच शुरू हुई। टाला ब्रिज को पहले ही ध्वस्त कर नये ब्रिज बनाया जा चुका है। सियालदह फ्लाईओवर के साथ साथ चितपुर और कालीघाट पुल को तोड़ कर नए ब्रिज के निर्माण की योजना है। लेकिन कोलकाता के सबसे महत्वपूर्ण पुलों में सियालदह फ्लाईओवर सबसे ऊपर है।
प्रशासन का मानना है कि अगर सियालदह फ्लाईओवर टूटा तो न केवल मध्य और उत्तरी कोलकाता का यातायात बुरी तरह प्रभावित होगा, बल्कि जन-जीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाएगा। इसलिए फिलहाल वे सुधार कार्य जल्द शुरू करने के पक्ष में हैं। इसलिए, केएमडीए ने इस बार सियालदह फ्लाईओवर की सेहत दुरुस्त करने के प्रयास शुरू कर दिये हैं। इसके लिए करीब 15 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। निरीक्षण के बाद प्रशासनिक स्तर पर इस बात पर चर्चा होगी कि सियालदह फ्लाईओवर के नीचे की दुकानों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा सकता है या नहीं। हालाँकि, दुकानदारों के एक वर्ग का सवाल है कि हमें सुरक्षा कारणों से उन्हें वह काम करने की अनुमति देने में कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन हमारा क्या होगा, हम कहाँ जायेंगे?