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मिठाई के आदान प्रदान के बाद जागी उम्मीद, लिखा जा रहा है पत्र
कोलकाता। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल के साथ रिश्ते जगजाहीर हैं लेकिन हाल ही में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच मिठाई का आदान प्रदान रिश्ते के खटास के दूर होने के साथ साथ संबंधों के मधुर होने के संकेत है। बंगाल में 6 सीटों पर हुए उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली विराट जीत दर्ज की है ऐसे में अब ये देखने का समय है कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस का यह परोपकारी संदेश महज दिखावा है या वह वाकई वे सीएम के साथ रिश्ते सुधारना चाहते हैं। क्या राज्यपाल विधानसभा में आकर नवनिर्वाचित विधायकों को सपथ दिलाते हैं या फिर एक बार फिर से टकराव होगा। जैसा कि हाल के दिनों में देखा गया है, विधायकों के शपथ को लेकर राजभवन और विधानसभा के बीच अनावश्यक जटिलताएं पैदा होती रही हैं। इस बार सीवी आनंद बोस ने विधानसभा के पत्र का क्या जवाब देते हैं, इस पर विधानसभा की नजर है। बंगाल विधानसभा का शीतकालिन सत्र 25 नवंबर से शुरू हो रहा है।
विधानसभा सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक विधानसभा की ओर से राजभवन को चिट्ठी लिखी जा रही हैं कि राज्यपाल जीते हुए 6 तृणमूल विधायकों को विधानसभा में आकर शपथ लेने के लिए आमंत्रित करे। इसे लेकर परिषद के मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय राजभवन को पत्र लिख रहे हैं। यदि राज्यपाल शपथ दिलाने के लिए नहीं आना चाहते हैं तो उनसे शपथ दिलाने के लिए किसी को नियुक्त करने का अनुरोध भी किया जाएगा। नियमों के मुताबिक अगर राज्यपाल विधानसभा में आकर शपथ नहीं दिलाना चाहते तो वह यह जिम्मेदारी सदन के स्पीकर को देते हैं। हालाँकि शपथ को लेकर पहले भी कई बार जटिलताएँ आ चुकी हैं। हाल ही में बारहनगर से विधायक सायंतिका बंद्योपाध्याय और भागवानगोल से विधायक रेयात हुसैन के शपथ को लेकर विधानसभा और राजभवन के बीच लंबी समय से खींचतान चली थी। उनके शपथ ग्रहण के लिए राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने राजभवन को पत्र भेजा गया था लेकिन नवनिर्वाचित विधायक इससे खुश नहीं थे और वे राजभवन के बजाये विधानसभा में ही शपथ लेना चाहते थे लेकिन राज्यपाल तैयार नहीं हुए थे जिसके कारण दोनों विधायक इस मुद्दे पर विधानसभा के सामने धरने पर बैठ गये थे।
आखिरकार राज्यपाल ने उपसभापति आशीष बनर्जी को शपथ दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। जिससे विधानसभा के स्पीकर बिमान बनर्जी नाराज हो गये थे। ऐसे में अब देखना यही हैं कि क्या राज्यपाल के साथ वाकई रिश्ते में सुधार हुआ हैं या फिर मिठाई का आदान प्रदान केवल एक नाटक हैं। विधानसभा अध्यक्ष चाहते हैं कि नए विधायक विधानसभा का शपथ राज्यपाल अपनी मौजूदगी में करवाए। अब देखने वाली बात है कि विधानसभा अध्यक्ष कब तक राज्यपाल को यह चिट्ठी भेजते हैं।राजनीतिक विशेषज्ञ बताते हैं कि राज्यपाल को विधानसभा में आकर नव निर्वाचित विधायक के शपथ को लेकर कोई दिक्कत नहीं होगी। माना जा रहा है कि अगर विधानसभा की तरफ से कोई चिट्ठी राज्यपाल को भेजी जाती है तो उसका जवाब भी बहुत जल्द दे सकते हैं और तो और वह नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ ग्रहण भी करवा सकते हैं।