स्थानीय लोगों की मांग है कि नगर निगम ऐसे मकानों पर तुरंत कार्रवाई करे ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो
कोलकाता। कोलकाता में मंगलवार को लगातार बारिश के बीच तीन पुराने मकान ढहने की घटनाएं सामने आई हैं। जानबाजार, नारकेलडांगा और मोचीपाड़ा तीनों जगह एक ही दिन मकान गिरने की खबर ने नगर निगम और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन संपत्ति को भारी नुकसान हुआ है। कोलकाता और आसपास के इलाकों में इस तरह की लगातार इमारत ध्वस्त होने की घटनाएं सरकार और नगर निगम की मौजूदा कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं। 2026 के चुनाव से पहले यह मुद्दा विपक्ष के लिए प्रमुख चुनावी हथियार बन सकता है। खासकर जब राज्य सरकार के मंत्री दावा करते हैं कि शहर को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित किया जा रहा है तो ऐसे हादसे इन दावों की सच्चाई पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। स्थानीय लोगों की मांग हैं कि जर्जर इमारतों की तत्काल सूची बनाकर खाली कराया जाए और उसकी मरम्मत करवायी जाये। साथ ही मांग हैं कि निर्माण और प्रमोटिंग के नाम पर असुरक्षित तरीके से तोडफ़ोड़ पर रोक लगे। एक ही दिन में तीन घरों का गिरना सिर्फ इत्तेफाक नहीं, बल्कि कोलकाता की पुरानी और उपेक्षित इमारतों की वास्तविक स्थिति की गंभीर चेतावनी है। आने वाले चुनाव में यह मुद्दा जनता और राजनेताओं दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।
मंगलवार सुबह कोलकाता के रानी रस्मोनी रोड पर एक पुराना मकान अचानक ढह गया। गनीमत रही कि हादसे के समय मकान खाली था, जिससे कोई हताहत नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि यह मकान काफी पुराना था और कोलकाता नगर निगम की ओर से पहले ही इसे 'खतरनाक' घोषित किया गया था। निगम ने यह भी कहा था कि जब तक मरम्मत नहीं होती, तब तक यह मकान रहने के लायक नहीं है। हादसे की खबर मिलते ही पुलिस और कोलकाता नगर निगम के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। प्राथमिक जांच में पता चला है कि हादसे के समय मकान में कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा नुकसान टल गया। अब पुलिस और निगम की ओर से मकान मालिक से बात की जा रही है। इससे पहले जून महीने में बाउबाजार इलाके के श्रीनाथ दास लेन में भी एक पुराना मकान ढह गया था। उस समय मरम्मत का काम चल रहा था, लेकिन मकान का एक हिस्सा गिर गया और एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया था। कोलकाता नगर निगम ने पहले ही शहर के पुराने और जर्जर मकानों की पहचान कर उन्हें मरम्मत करने का आदेश दिया था। बावजूद इसके कई मकानों की हालत जस की तस बनी हुई है। अब निगम फिर से ऐसे मकानों की सूची तैयार कर रहा है और जरूरी कार्रवाई की तैयारी में है। इस घटना ने एक बार फिर कोलकाता में पुराने और जर्जर मकानों की हालत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों की मांग है कि नगर निगम ऐसे मकानों पर तुरंत कार्रवाई करे ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो।