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सड़कों पर अब 24 घंटे तैनात रहेंगे इंस्पेक्टर
कोलकाता। कोलकाता की सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पुलिस मुख्यालय लालबाजार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। नए आदेश के अनुसार, शहर के प्रत्येक ट्रैफिक गार्ड में अब 24 घंटे कम से कम एक इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में दक्षिण कोलकाता के एक फ्लाईओवर पर हुई एक बड़ी सड़क दुर्घटना के दौरान संबंधित ट्रैफिक गार्ड में कोई भी इंस्पेक्टर मौजूद नहीं था। इस मामले को लालबाजार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बेहद गंभीरता से लिया।
पुलिस मुख्यालय का मानना है कि मौके पर वरिष्ठ अधिकारी की कमी के कारण अक्सर राहत कार्य और कानून व्यवस्था को संभालने में देरी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए डिप्टी कमिश्नर (ट्रैफिक) के माध्यम से सभी ट्रैफिक गार्डों को यह नया सर्कुलर जारी किया गया है। जारी किये गये नए विज्ञप्ति के अनुसार अब हर ट्रैफिक गार्ड क्षेत्र में दिन हो या रात, एक इंस्पेक्टर की ड्यूटी अनिवार्य होगी। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रैफिक प्रबंधन पर निरंतर नजर रखना और सड़क सुरक्षा मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करना है। दुर्घटना या किसी भी अप्रिय स्थिति में इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी के रहने से मौके पर फैसले लेना आसान होगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले बेहला में एक छात्र की ट्रक की चपेट में आने से हुई मौत के बाद भी कड़े नियम बनाए गए थे। उस समय स्कूल के समय में विद्यालय क्षेत्रों में इंस्पेक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य की गई थी। अब लालबाजार ने उसी सुरक्षा मॉडल को पूरे शहर और हर समय के लिए विस्तारित कर दिया है। लालबाजार के इस आदेश का स्वागत तो हो रहा है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने में कुछ व्यावहारिक मुश्किलें भी सामने आ रही हैं। पुलिस महकमे के भीतर चर्चा है कि कई ट्रैफिक गार्ड में वर्तमान में केवल दो ही इंस्पेक्टर तैनात हैं। यदि एक इंस्पेक्टर फील्ड ड्यूटी या किसी अन्य सरकारी कार्य में व्यस्त रहता है, तो गार्ड में हर समय दूसरे इंस्पेक्टर की उपस्थिति सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है। कुछ गार्ड ऐसे भी हैं जहाँ अधिकारी प्रभारी यानी ओसी के पद खाली हैं, जिससे शिफ्ट रोटेशन में समस्या आ सकती है।
चुनौतियों के बावजूद, लालबाजार का यह कदम शहर की यातायात व्यवस्था को आधुनिक और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। अब देखना यह है कि विभाग मैनपावर की कमी को दूर कर इस आदेश को कितनी कुशलता से लागू कर पाता है।