वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
राज्यपाल ने यह भी सलाह दी है कि मदद के लिए आने वाली कॉल्स पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जाए
कोलकाता। चुनाव से पहले कुछ जगहों पर हिंसा देखने को मिली है। इस पर विपक्ष सरकार और राज्य पुलिस पर तरह-तरह के आरोप लगा रहा है। अब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस की तरफ से गाइडलाइन जारी की गई है। गाइडलाइन में कहा गया है कि हालिया घटनाओं से पता चलता है कि असामाजिक और विघटनकारी ताकतें बहुत कम समय में सैकड़ों उग्र और हिंसक प्रदर्शनकारियों को जुटा सकती हैं। इस तरह की तेज घटनाएं आम नागरिकों के लिए भारी परेशानी पैदा करती हैं, सामान्य जीवन को बाधित करती हैं और जान-माल के लिए खतरा बन जाती हैं। इसको लेकर राज्यपाल ने हिंसा, उसके बढऩे, नियंत्रण से बाहर होने और उससे होने वाले व्यवधानों को रोकने के लिए सक्षम अधिकारियों के विचारार्थ निम्नलिखित परामर्श सुझाए हैं। इसमें खुफिया तंत्र को मजबूत करने, केंद्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियों तथा स्थानीय मुखबिरों के नेटवर्क के बीच बेहतर समन्वय रखने की सलाह दी गई है।
राज्यपाल ने कहा है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां रियल टाइम खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और उसका विश्लेषण करने की व्यवस्था बनाएं, ताकि किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति और उसके बढऩे की पहले से सूचना मिल सके। मौजूदा संवेदनशील और भड़काऊ मुद्दों का अध्ययन किया जाए। उन मुद्दों और स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिन्होंने जनता को उकसाया है।उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं काफी हद तक खुली और संवेदनशील हैं। सीमा के दोनों ओर से जुड़े मुद्दों को देखते हुए केंद्र और राज्य के बीच संयुक्त खुफिया तंत्र को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। सतर्कता बनाए रखी जाए और सक्रिय गश्त की जाए। भरोसा कायम करने के लिए समुदायों के साथ संवाद किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगडऩे से रोकने के लिए प्रभावी रोकथाम उपाय किए जाएं। उकसावे में शामिल लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। तनाव कम करने के लिए स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय किया जाए। संवेदनशील जिलों में निगरानी बढ़ाई जाए। राज्यपाल ने यह भी सलाह दी है कि मदद के लिए आने वाली कॉल्स पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जाए। भीड़ नियंत्रण के दौरान संयम बरता जाए। कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगडऩे से रोकने या शांत करने के लिए स्थानीय नेताओं से बातचीत की जाए।