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सियासी मंच पर फिसली भाजपा अध्यक्ष की जुबान, शुरू हुआ उपहास का दौर

टैगोर के 'साहित्य' को बताया 'शांति' का नोबेल

28 Jan 2026

सियासी मंच पर फिसली भाजपा अध्यक्ष की जुबान, शुरू हुआ उपहास का दौर

कोलकाता। बंगाल की राजनीतिक जमीन को समझने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने आए भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बुधवार को एक ऐतिहासिक भूल कर विवादों के केंद्र में आ गए। दुर्गापुर में आयोजित बर्धमान मंडल के कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने विश्वकवि रवींद्रनाथ ठाकुर को लेकर ऐसा दावा किया, जिसने न केवल विपक्षी दलों को हमले का मौका दे दिया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी हंसी का तूफान ला दिया। नितिन नवीन ने अपने भाषण में कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर को उनकी नई शिक्षा पद्धति के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला था, जबकि सर्वविदित तथ्य है कि उन्हें 1913 में उनकी कालजयी काव्य रचना गीतांजलि के लिए साहित्य का नोबेल प्रदान किया गया था। भाजपा अध्यक्ष का यह बयान सामने आते ही तृणमूल ने इसे बंगाल की अस्मिता और संस्कृति के प्रति भाजपा की अज्ञानता करार दिया। 
तृणमूल ने तंज कसते हुए कहा कि जो दल बंगाल के मनीषियों के इतिहास और उनकी उपलब्धियों तक से वाकिफ नहीं है, वह बंगाल की संस्कृति को बचाने का दावा कैसे कर सकता है? माकपा और कांग्रेस ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे बंगाल के महान नायक का अपमान बताया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव की दहलीज पर खड़े बंगाल में इस तरह की फैक्टुअल गलती पार्टी की छवि के लिए घातक साबित हो सकती है, खासकर तब जब विपक्षी दल लगातार भाजपा को बाहरी और बंगाली संस्कृति से अनभिज्ञ बताने की कोशिश कर रहे हैं। यह पहला मौका नहीं है जब किसी बड़े भाजपा नेता की जुबान बंगाल के महापुरुषों को लेकर फिसली है। इससे पहले भी शांति निकेतन और टैगोर से जुड़े बयानों पर जमकर विवाद हुआ था। करीब 35 मिनट के अपने संबोधन में नितिन नवीन ने हालांकि बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों में जीत का मंत्र दिया, लेकिन उनके भाषण का सार उस एक गलत संदर्भ की भेंट चढ़ गया। भाजपा के स्थानीय नेतृत्व ने हालांकि इस पर सफाई देने की कोशिश की है, लेकिन वीडियो के वायरल होने से पार्टी असहज स्थिति में है। बंगाल के प्रबुद्ध वर्ग के बीच भी इस गलत बयानी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। जानकारों का मानना है कि ऐसे समय में जब भाजपा बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, इतिहास की ऐसी बड़ी चूक उसके बंगाली कार्ड को कमजोर कर सकती है। 

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