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'सोच-समझकर छोड़ा पद, उचित समय पर खुलेगा राज'
कोलकाता। पूर्व राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने रविवार को अपने पद से त्यागपत्र देने के निर्णय को एक सुविचारित फैसला करार देते हुए राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। पद छोडऩे के बाद पहली बार मीडिया से रूबरू हुए बोस ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह निर्णय बहुत सोच-समझकर लिया था, हालांकि इसके पीछे के वास्तविक कारणों पर उन्होंने फिलहाल चुप्पी साधे रखी। उन्होंने रहस्यमयी अंदाज में कहा कि इस्तीफे की वजह उचित समय आने तक पूरी तरह गोपनीय रहेगी। कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व राज्यपाल ने अपने साढ़े तीन साल के कार्यकाल को क्रिकेट की शब्दावली में परिभाषित किया।
उन्होंने कहा कि खेल का एक नियम होता है कि उसे कब खत्म करना है। मैंने बंगाल में करीब 1200 दिन पूरे किए हैं, जो क्रिकेट की भाषा में 12 शतकों के बराबर हैं। किसी भी पारी को समाप्त करने का एक सही समय होता है और मैंने अनुभव किया कि मेरे लिए यही एग्जिट करने का सही समय था। उन्होंने उन अटकलों को भी खारिज करने का प्रयास किया जिनमें उनके इस्तीफे को अचानक या दबाव में लिया गया फैसला बताया जा रहा था। बोस ने कहा कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, तभी उन्हें पता था कि एक दिन प्रस्थान भी होगा और उन्हें खुद यह तय करने का अवसर दिया गया कि वह समय कब हो।
विशेष बात यह है कि केरल के मूल निवासी होने के बावजूद सीवी आनंद बोस ने इस्तीफे से महज एक सप्ताह पूर्व ही स्वयं को बंगाल के मतदाता के रूप में पंजीकृत कराया था। उन्होंने घोषणा की है कि वह एक नागरिक के तौर पर अपना वोट डालने के लिए पुन: बंगाल आएंगे। यह कदम उनके बंगाल के साथ गहरे जुड़ाव को दर्शाता है, जिसे लेकर वे अपने कार्यकाल के दौरान भी अक्सर चर्चा में रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बंगाल दौरे के दौरान हुए प्रोटोकॉल विवाद और उनके द्वारा जताई गई चिंताओं पर पूछे गए सवाल को पूर्व राज्यपाल बड़ी चतुराई से टाल गए। हालांकि, उन्होंने राष्ट्रपति के व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह एक अत्यंत अनुभवी और संतुलित शख्सियत हैं और उनके द्वारा कही गई बातों के पीछे निश्चित रूप से ठोस कारण रहे होंगे। एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और बहुमुखी प्रतिभा के धनी सीवी आनंद बोस का कार्यकाल बंगाल के राजभवन और सचिवालय नवान्न के बीच कई उतार-चढ़ावों का गवाह रहा है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों से प्रभावित और भाजपा की पृष्ठभूमि रखने वाले बोस का अब अचानक चुनावी बेला में पद से हटना राज्य की भावी राजनीति के लिए किस नए खेला का संकेत है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, आरएन रवि को बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने की सूचना के बीच बोस की विदाई ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं।