वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
जो खुद कटघरे में हैं, वे किस आधार पर दे रहे हैं आरोप पत्र?
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की तारीखें नजदीक आते ही राज्य में राजनीतिक युद्ध चरम पर पहुंच गया है। शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता दौरे और भाजपा द्वारा ममता सरकार के खिलाफ जारी की गई चार्जशीट पर तृणमूल ने कड़ा पलटवार किया है।
तृणमूल के वरिष्ठ नेता और दमदम से उम्मीदवार ब्रात्य बसु ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए केंद्र सरकार की विफलताओं का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। ब्रात्य बसु ने तंज कसते हुए अमित शाह की चार्जशीट सभा की तुलना शेक्सपियर के नाटक जूलियस सीजर के एक दृश्य से कर दी। उन्होंने कहा कि भाजपा की स्थिति उस न्यायाधीश जैसी है जो खुद आरोपी की कुर्सी पर बैठा है और दूसरों पर फैसला सुना रहा है। महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा को आईना दिखाते हुए बसु ने कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो और केंद्र के अपने आंकड़े गवाह हैं कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे भाजपा शासित या समर्थित राज्यों में महिलाएं सबसे असुरक्षित हैं। उन्होंने सवाल किया कि जो दल अपने राज्यों में कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम है, वह बंगाल की नारी शक्ति पर सवाल उठाने का साहस कैसे कर सकता है? हमले को और धार देते हुए तृणमूल नेता ने भाजपा पर सुविधा की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता बंगाल में आकर जनसंख्या संतुलन और घुसपैठ की बात करते हैं, लेकिन मणिपुर की हिंसा और गुजरात के ज्वलंत मुद्दों पर उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता। बसु ने कहा कि भाजपा का नजरिया पूरी तरह चयनात्मक है और वे केवल उन मुद्दों को हवा देते हैं जिनसे ध्रुवीकरण की राजनीति को बल मिले। इस दौरान ब्रात्य बसु ने केंद्र सरकार पर आर्थिक नाकेबंदी का भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक विद्वेष के चलते केंद्र ने जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजना के तहत पश्चिम बंगाल का करीब 2 लाख करोड़ रुपये का जायज बकाया रोक रखा है। उन्होंने इसे बंगाल की जनता का अपमान बताते हुए कहा कि दिल्ली की सरकार बंगाल के विकास में रोड़े अटका रही है, लेकिन राज्य की जनता इस अपमान का बदला बैलेट बॉक्स के जरिए लेगी। ब्रात्य बसु ने स्पष्ट किया कि भाजपा बंगाल की संस्कृति, यहां के महापुरुषों और बंगाली अस्मिता को समझे बिना यहां सत्ता का सपना देख रही है, जो कभी पूरा नहीं होगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दो चरणों के मतदान (23 और 29 अप्रैल) में बंगाल की जनता बाहरी ताकतों को करारा जवाब देगी। इस जुबानी जंग ने साफ कर दिया है कि चुनाव के आखिरी दौर में दोनों दलों के बीच मुकाबला अब आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो चुका है।