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वोटर लिस्ट से नाम कटने पर बवाल
कोलकाता। विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े राज्य में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों ने बारूद का काम किया है। दक्षिण 24 परगना से लेकर हावड़ा और उत्तर 24 परगना तक, हजारों वैध मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से गायब होने के बाद जनता का धैर्य जवाब दे गया। सोमवार को राज्य के कई हिस्सों में उग्र प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने न केवल सड़कों पर टायर जलाकर यातायात ठप किया, बल्कि सुरक्षा के लिए तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के सामने काले झंडे दिखाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
चुनावी निष्पक्षता को लेकर उठे इस बवंडर ने प्रशासनिक खेमे में खलबली मचा दी है। सबसे भीषण विरोध प्रदर्शन दक्षिण 24 परगना के मगरहाट इलाके में देखा गया। यहां मूलटी ग्राम पंचायत के बूथ संख्या 89 पर 33 मतदाताओं के नाम अचानक गायब मिलने पर ग्रामीण आपे से बाहर हो गए और धामुआ रोड को पूरी तरह जाम कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनके नाम पहले विचाराधीन श्रेणी में रखे गए थे, लेकिन सप्लीमेंटरी सूची जारी होने के बाद भी उन्हें शामिल नहीं किया गया। इसी तरह की तनावपूर्ण स्थिति हावड़ा के जगतबल्लभपुर में बनी रही, जहां दो बूथों से लगभग 850 मतदाताओं के नाम हटाए जाने की खबर ने सनसनी फैला दी। यहां प्रदर्शनकारियों और केंद्रीय बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिससे इलाके में भारी तनाव व्याप्त है। उत्तर 24 परगना के हासनाबाद में भी स्थिति विस्फोटक बनी हुई है, जहां करीब 655 मतदाताओं के नाम सूची से नदारद मिले।
प्रभावित लोगों का कहना है कि वे महीनों से बीएलओ और बीडीओ कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। वहीं, अलीपुरद्वार में इस मुद्दे ने पूर्णत: राजनीतिक रंग अख्तियार कर लिया है। स्थानीय पार्षद ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने वाली महिलाओं के नाम चुन-चुनकर सूची से बाहर किए गए हैं, ताकि एक विशेष वोट बैंक को प्रभावित किया जा सके।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नियुक्त न्यायिक अधिकारियों की देखरेख में चल रही है। बताया जा रहा है कि करीब 60 लाख नाम विचाराधीन सूची में थे, जिनमें से दस्तावेजों की विसंगति के कारण बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। इस बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने आनन-फानन में ट्राइब्यूनल पोर्टल की शुरुआत की है, ताकि पीडि़त मतदाता अपनी अपील दर्ज करा सकें।
हालांकि, चुनाव से ऐन पहले लाखों लोगों के मताधिकार पर मंडराते इस खतरे ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और आगामी मतदान की शुचिता को लेकर बहस छेड़ दी है।