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हावड़ा में 'लोकतंत्र' की वापसी की तैयारी

8 साल का सूखा होगा खत्म, मुख्यमंत्री ने अग्निमित्रा संग कसी कमर

12 May 2026

हावड़ा में 'लोकतंत्र' की वापसी की तैयारी

कोलकाता। बंगाल की सत्ता में परिवर्तन के साथ ही प्रशासनिक गलियारों में भारी फेरबदल और लंबित कार्यों को गति देने का सिलसिला शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले ही कार्यदिवस पर शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हावड़ा नगर निगम के लंबित चुनाव हैं। पिछले आठ वर्षों से अधर में लटके इस चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री ने सोमवार को नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल के साथ गहन चर्चा की। इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद अब यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि हावड़ा के नागरिकों का अपने जन प्रतिनिधियों को चुनने का लंबा इंतजार जल्द ही समाप्त होने वाला है। 
हावड़ा नगर निगम का इतिहास पिछले एक दशक से विवादों और राजनीतिक खींचतान की भेंट चढ़ता रहा है। साल 2013 के बाद से यहाँ दोबारा चुनाव नहीं हुए, जबकि 2018 में ही बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो चुका था। पिछली सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि उसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने के बजाय बार-बार प्रशासकों की नियुक्ति कर निगम का संचालन किया। इस दौरान बाली नगरपालिका को हावड़ा में मिलाने और फिर अलग करने की कानूनी व तकनीकी पेचीदगियों ने मामले को और अधिक उलझा दिया। तत्कालीन राज्यपाल जगदीप धनखड़ द्वारा निगम की वित्तीय स्थिति और फंड के आवंटन पर उठाए गए सवालों का संतोषजनक जवाब न मिल पाना भी चुनाव टलने का एक बड़ा कारण बना था।
नगर निगम में जन प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति का सीधा असर हावड़ा की बुनियादी नागरिक सेवाओं पर पड़ा है। पिछले छह वर्षों से प्रशासकों के भरोसे चल रहे इस शहर में जल निकासी, पेयजल आपूर्ति, सड़कों की मरम्मत और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। स्थानीय निवासियों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि बिना निर्वाचित बोर्ड के उनकी समस्याओं की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। राजनीतिक हलकों में भी अब स्वर बदलने लगे हैं; जहाँ भाजपा ने पिछली सरकार पर जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया है, वहीं तृणमूल के स्थानीय नेतृत्व ने भी स्वीकार किया है कि लंबे समय तक प्रशासक के जरिए निगम चलाना विकास कार्यों में बाधक साबित हुआ है। 
नवनियुक्त नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने मुख्यमंत्री के साथ हुई चर्चा की पुष्टि करते हुए कहा कि हावड़ा की स्थिति वर्तमान सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का विजन हावड़ा को जर्जर अवस्था से बाहर निकालकर एक आधुनिक शहर के रूप में विकसित करना है, जिसकी शुरुआत निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावों से होगी। सरकार अब उन सभी कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने में जुट गई है, जो पिछले आठ सालों से रोड़ा बनी हुई थीं। सत्ता के गलियारों में चल रही इस सक्रियता ने हावड़ा के आम नागरिकों में एक नई उम्मीद जगा दी है कि जल्द ही उनके शहर की कमान एक निर्वाचित और जवाबदेह बोर्ड के हाथों में होगी।

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