वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
तेल और टोल की दोहरी मार से हाफ रही निजी बसें
कोलकाता। लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों और टोल टैक्स में हालिया इजाफे ने बंगाल के बस मालिकों की मुश्किलें बेहद बढ़ा दी हैं। राज्य के विभिन्न परिवहन संगठनों का साफ कहना है कि मौजूदा किराए के ढांचे में बस संचालन करना अब पूरी तरह घाटे का सौदा बन चुका है। इसी गंभीर वित्तीय संकट के मद्देनजर अलग-अलग निजी बस मालिक संगठनों ने राज्य सरकार से बस किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। परिवहन व्यवस्था को पटरी पर बनाए रखने के लिए संगठनों की ओर से किराए में 10 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा गया है।
बस मालिकों का दावा है कि पिछले कुछ महीनों में ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिससे मासिक परिचालन लागत में भारी इजाफा हुआ है। उनके आंकड़ों के मुताबिक, एक सामान्य बस पर हर महीने लगभग 15 हजार से 30 हजार रुपये तक का अतिरिक्त ईंधन खर्च बढ़ गया है। इसके साथ ही, हाईवे और एक्सप्रेसवे पर मौजूद टोल प्लाजा पर टोल टैक्स की दरों में की गई बढ़ोतरी ने लंबी दूरी की निजी बस सेवाओं पर आर्थिक दबाव को और अधिक दोगुना कर दिया है।
परिवहन संगठनों के अनुसार, खासकर लंबी दूरी और नेशनल हाईवे के रूटों पर चलने वाली बसों के लिए स्थिति अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। कई प्रमुख रूटों पर बसों का मासिक संचालन खर्च 70 हजार रुपये से भी ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे में पुराने और सालों पहले तय हुए किराए पर बसों को सड़क पर उतारना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं रह गया है। 'जॉइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट' के महासचिव तपन बंद्योपाध्याय ने इस संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि बसों की आय की तुलना में रोजमर्रा का खर्च बहुत तेजी से बढ़ गया है। उन्होंने साफ किया, हम लगातार सरकार से किराया बढ़ाने की जायज मांग कर रहे हैं। बस मालिक हर दिन घाटा सहकर गाडिय़ां चला रहे हैं। अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है, इसलिए न्यूनतम किराए से लेकर लंबी दूरी के किराए तक में कम से कम 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि बेहद जरूरी हो गई है।
वहीं सिटी सबअर्बन बस ऑर्गेनाइजेशन के वरिष्ठ नेता टीटो साहा ने कहा कि पिछले कई वर्षों से उनके संगठन वास्तविक और जमीनी परिस्थितियों का हवाला देकर सरकार से किराया संशोधन की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि स्थिति अब बेहद गंभीर और नाजुक मोड़ पर पहुंच चुकी है। किराया सालों से जस का तस है, लेकिन ईंधन की कीमतें और स्पेयर पार्ट्स के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। ऐसे में निजी बस मालिकों की हालत 'न घर के न घाट केÓ जैसी होकर रह गई है।
बस मालिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि राज्य सरकार की ओर से जल्द ही किराए में बढ़ोतरी को हरी झंडी नहीं दी गई, तो कई रूटों पर निजी बस ऑपरेटर अपनी सेवाएं पूरी तरह बंद करने पर मजबूर हो जाएंगे। दूसरी ओर, इस संभावित किराया बढ़ोतरी की आहट से आम यात्रियों की चिंताएं भी गहरी होने लगी हैं, क्योंकि पहले से ही महंगाई की चौतरफा मार झेल रहे मध्यम और निम्न वर्ग की जेब पर इसका सीधा और बड़ा असर पडऩा तय है।