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इसके अलावा, अस्पतालों में सक्रिय दलालों के सिंडिकेट को खत्म करने के लिए एक विशेष ऐप-आधारित सरकारी एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की भी तैयारी है
कोलकाता। बंगाल के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अक्सर इलाज के लिए बेड न मिलने और रेफर किए जाने की समस्याओं से जूझना पड़ता है। इस गंभीर संकट से आम जनता को राहत देने के लिए राज्य सरकार एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की पहल और मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों, निजी मेडिकल कॉलेजों और केंद्रीय सरकारी अस्पतालों के बेड को आपस में जोड़कर एक जनरल बेड पूल बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी गंभीर मरीज को बेड की कमी के कारण इलाज के बिना न भटकना पड़े।
स्वास्थ्य भवन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस योजना के तहत एक अत्यंत आधुनिक और सीमलेस रेफरल सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसके लागू होने के बाद यदि किसी बड़े सरकारी अस्पताल में बेड खाली नहीं होगा, तो मरीज को तुरंत डिजिटल सिस्टम के जरिए किसी नजदीकी केंद्रीय अस्पताल या अनुबंधित निजी मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया जाएगा। सरकार की इस योजना में उन निजी अस्पतालों को मुख्य रूप से शामिल किया जा रहा है, जिन्होंने स्थापना के समय सरकार से बेहद रियायती दरों, महज एक रुपये या पूरी तरह मुफ्त में जमीन हासिल की थी। नियमों के मुताबिक, इन अस्पतालों को अपने कुल बेड का 10 से 15' और ओपीडी सेवाओं का करीब 40' हिस्सा गरीब व लाचार मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य था, लेकिन लंबे समय से इन शर्तों के उल्लंघन के आरोप लग रहे थे।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम ने स्पष्ट किया है कि सरकार और निजी अस्पतालों के बीच हुए पुराने समझौतों की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे सभी डिफाल्टर अस्पतालों की सूची तैयार कर रहा है और जल्द ही इस विषय पर निजी अस्पताल प्रबंधन के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी। इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य भवन में एक केंद्रीयकृत कंट्रोल रूम स्थापित करने पर भी विचार चल रहा है, जहां से राज्यभर के अस्पतालों में खाली बेडों की डिजिटल माध्यम से रीयल-टाइम ट्रैकिंग की जाएगी। इसके अलावा, अस्पतालों में सक्रिय दलालों के सिंडिकेट को खत्म करने के लिए एक विशेष ऐप-आधारित सरकारी एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की भी तैयारी है।
सरकार की इस कल्याणकारी मुहिम का निजी चिकित्सा क्षेत्र ने भी सकारात्मक स्वागत किया है। पूर्वी भारत प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन के अध्यक्ष रूपक बरुआ ने इस कदम को व्यावहारिक बताते हुए कहा कि सरकारी स्वास्थ्य ढांचे पर बढ़ते अत्यधिक दबाव को कम करने के लिए निजी क्षेत्र के बेड का सही इस्तेमाल समय की मांग है। हालांकि, कुछ बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों का कहना है कि वे सरकार की अंतिम और औपचारिक गाइडलाइन देखने के बाद ही अपनी प्रशासनिक प्रतिक्रिया देंगे।
उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौर का उदाहरण देते हुए भरोसा जताया कि संकट के समय पहले भी निजी अस्पतालों ने सरकार के साथ मिलकर काम किया था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वित्तीय और प्रशासनिक तालमेल सही ढंग से बैठ गया, तो यह योजना बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।