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13 दिनों से फरार तृणमूल विधायक दिलीप मंडल आलीशान होटल से गिरफ्तार
कोलकाता। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए विष्णुपुर से कद्दावर तृणमूल विधायक दिलीप मंडल को ओडिशा के पुरी से गिरफ्तार कर लिया है। खुले मंच से पुलिस प्रशासन को गंभीर भुगतने की धमकी देने के मामले में नामजद विधायक पिछले 13 दिनों से लगातार फरार चल रहे थे। एसटीएफ की कई टीमों ने देश के विभिन्न राज्यों में खाक छानने के बाद आखिरकार बुधवार को उन्हें पुरी के समुद्र तट के पास स्थित एक बेहद आलीशान ब्लू लिली होटल से धर दबोचा। विधायक वहां अपनी पहचान छिपाकर छिपे हुए थे।
इस पूरे विवाद की शुरुआत बीते 11 मई को हुई थी, जब राज्य में चुनावी नतीजों के बाद निकले एक विजय जुलूस के दौरान दिलीप मंडल ने खुले मंच से पुलिस अधिकारियों को धमकाते हुए एक बेहद विवादित और भड़काऊ भाषण दिया था। इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो गया, जिसके बाद चौतरफा दबाव में विष्णुपुर थाने में उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला दर्ज होते ही विधायक भूमिगत हो गए। जांच को आगे बढ़ाते हुए 14 मई को जब पुलिस की भारी फौज पाइलान स्थित उनके निजी आवास पर छापेमारी करने पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। विधायक का वह बंगला किसी आलीशान फाइव-स्टार रिसॉर्ट जैसा था, जिसमें बड़ा बागान, स्विमिंग पूल, फव्वारे और विदेशों से मंगाई गई महंगी मूर्तियां लगी थीं। हालांकि, उस आलीशान महल से विधायक पहले ही खिसक चुके थे।
डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाले विष्णुपुर इलाके में दिलीप मंडल और उनके परिवार का लंबे समय से एकछत्र राज और भारी दबदबा रहा है। उन पर और टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व पर विपक्षी भाजपा नेता अभिजीत दास ने पूर्व में करोड़ों रुपये के भूमि घोटाले में शामिल होने का बेहद संगीन आरोप भी लगाया था। आरोपों के मुताबिक, बहुचर्चित शारदा चिटफंड घोटाले से जुड़ी जमीनों से अवैध रूप से मिट्टी निकालकर बेचने और करीब 400 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय अनियमितता करने के काले कारोबार में विधायक की सीधी संलिप्तता थी। इसके अलावा, इलाके में चलने वाले सिंडिकेट राज और जबरन उगाही में भी उनका नाम लगातार उछलता रहा है।
विधायक दिलीप मंडल की मुश्किलें तब और बढ़ गई थीं जब बीते 13 मई को एसटीएफ ने उनके बेटे अर्घ्य मंडल को भारी मात्रा में अवैध हथियारों के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बेटे पर भी इलाके में सिंडिकेट चलाने और जबरन वसूली के कई मामले दर्ज हैं। बेटे की गिरफ्तारी के बाद से ही एसटीएफ ने विधायक को पकडऩे के लिए जाल बिछाना शुरू कर दिया था, जो आखिरकार पुरी में जाकर सफल हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और नए प्रशासन के सख्त रुख के कारण अब टीएमसी के ऐसे रसूखदार नेताओं पर कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। एसटीएफ अब दिलीप मंडल को ट्रांजिट रिमांड पर पश्चिम बंगाल लाने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।