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'अंडा हमले' पर आर-पार, ममता कल बैठेंगी धरने पर

आज तृणमूल का राज्यव्यापी ब्लॉक प्रदर्शन रानी रासमणि रोड पर आंदोलन की मिली अनुमति

31 May 2026

'अंडा हमले' पर आर-पार, ममता कल बैठेंगी धरने पर

कोलकाता। बंगाल की सियासत में रविवार को उस वक्त एक नया और बेहद उग्र तूफान खड़ा हो गया, जब तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में हुए कथित हमले के विरोध में सत्तापक्ष ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया। अभिषेक बनर्जी के साथ हुई मारपीट, कपड़े फाड़े जाने और उन पर अंडे व ईंट-पत्थर फेंके जाने की इस अभूतपूर्व घटना को तृणमूल कांग्रेस ने लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है। इसके विरोध में पार्टी ने सोमवार को राज्य के प्रत्येक ब्लॉक में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया है। वहीं, इस राजनीतिक संग्राम को चरम पर ले जाते हुए खुद पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मोर्चा संभाल लिया है और वह मंगलवार को ऐतिहासिक रानी रासमणि रोड पर विशाल धरने पर बैठेंगी, जिससे राज्य का सियासी तापमान सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस बड़े आंदोलन की आधिकारिक घोषणा रविवार को तृणमूल के प्रदेश महासचिव और विधायक कुणाल घोष ने कालीघाट में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान की। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा कि शीर्ष नेता अभिषेक बनर्जी पर हुए इस कायराना हमले को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसका राजनीतिक व लोकतांत्रिक जवाब दिया जाएगा। 
उन्होंने स्पष्ट किया कि सोमवार को राज्यभर के सभी जिलों के हर एक ब्लॉक में पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर इस बर्बरता का विरोध करेंगे। इसके अगले ही दिन यानी मंगलवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कोलकाता के रानी रासमणि रोड पर धरना-प्रदर्शन की कमान संभालेंगी, जिसके लिए पुलिस प्रशासन की तरफ से आधिकारिक अनुमति भी मिल चुकी है। 
गौरतलब है कि हालिया विधानसभा चुनाव के बाद बदली हुई परिस्थितियों के बीच तृणमूल ने पहले ही यह घोषणा की थी कि राजनीतिक हिंसा में प्रभावित और मारे गए पार्टी कार्यकर्ताओं के परिवारों को ढांढस बंधाने के लिए अभिषेक बनर्जी विभिन्न जिलों का सघन दौरा करेंगे। इसी कड़ी के तहत शनिवार को वह सोनारपुर में मारे गए पार्टी कार्यकर्ता संजू कर्मकार के परिजनों से मिलने उनके घर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में भारी अराजकता देखने को मिली, जब कुछ लोगों ने उनके काफिले को घेर लिया और उनके खिलाफ 'चोर-चोर' के नारे लगाने शुरू कर दिए। 
देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया और अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाकर अंडे तथा ईंट के टुकड़े फेंके जाने लगे, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
इस हिंसक धक्का-मुक्की और हंगामे के बीच स्थिति इतनी संवेदनशील और तनावपूर्ण हो गई थी कि सुरक्षा घेरे को तोड़कर किसी तरह अभिषेक बनर्जी को सुरक्षित वहां से निकालकर कोलकाता लाया गया। शारीरिक असहजता और चोटों की शिकायत के बाद उन्हें कोलकाता के दो अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी गहन जांच की। गनीमत रही कि चोटें बहुत गंभीर नहीं थीं, जिसके कारण डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार और आवश्यक चिकित्सा सहायता देने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करने के बजाय घर भेज दिया। हालांकि, इस घटना के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर और बाहर भारी आक्रोश व्याप्त है और पार्टी लगातार विपक्षी ताकतों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है। शनिवार की इस घटना के बाद रविवार को भी पश्चिम बंगाल के कई जिलों में स्वत:स्फूर्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिले, जहां सड़कों पर उतरे तृणमूल कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ तीखी झड़पें हुईं और कई इलाकों से पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं को हिरासत में लिए जाने की भी खबरें सामने आई हैं। इसी बीच सत्तापक्ष की ओर से यह गंभीर दावा भी किया गया है कि तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी भी इस कथित हमले और अभद्रता का शिकार हुए हैं, जिसने आग में घी डालने का काम किया है। राजनीतिक हलकों में अब इस बात को लेकर भी भारी कयासबाजी चल रही है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में बने तनावपूर्ण माहौल के बीच जिलों से कितने वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मंगलवार को कोलकाता के इस महाधरने में शामिल हो पाएंगे। 
कुणाल घोष ने साफ किया कि पार्टी नेतृत्व हर क्षेत्र की जमीनी और क्षेत्रीय परिस्थितियों का बारीकी से आकलन कर रहा है और उसी के आधार पर नेता व जनप्रतिनिधि कोलकाता पहुंचेंगे। लेकिन उन्होंने यह भी दो टूक शब्दों में साफ कर दिया कि चाहे परिस्थितियां जो भी हों, पार्टी का यह आंदोलन पूरी ताकत और जनसमर्थन के साथ जारी रहेगा। तृणमूल कांग्रेस जहां इस पूरे घटनाक्रम को विपक्षी ताकतों की एक बेहद सुनियोजित और गहरी राजनीतिक साजिश बता रही है, वहीं विपक्ष इस पर अपना अलग स्टैंड रख रहा है। बहरहाल, सोनारपुर की इस घटना ने बंगाल की राजनीति की दिशा मोड़ दी है और अब हर किसी की नजरें सोमवार के राज्यव्यापी प्रदर्शन और मंगलवार को ममता बनर्जी के होने वाले धरने पर टिकी हैं।
 

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