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'हम ही असली तृणमूल, कांग्रेस में विलय का सवाल नहीं'
कोलकाता। बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। तृणमूल के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान अब खुलकर बगावत के रूप में सामने आ चुकी है। बुधवार को विधानसभा परिसर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए विपक्ष के नेता ऋतोब्रत बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल के विद्रोही खेमे की ताकत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उनके साथ बागी विधायकों की संख्या अब 58 से बढ़कर 64 हो चुकी है और आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और ऊपर जाएगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के साथ बढ़ती नजदीकियों और सोनिया गांधी समेत शीर्ष नेताओं के साथ बैठकों के बाद टीएमसी के कांग्रेस में विलय की अटकलें तेज हैं। इन अटकलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए ऋतोब्रत बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया, कांग्रेस में शामिल होने या विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता। हम ही असली तृणमूल हैं और हम कांग्रेस में नहीं जा रहे हैं। उन्होंने अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सीधा तंज कसते हुए कहा कि अभिषेक के पास संगठन का नाम तो है, लेकिन संगठन का वास्तविक ढांचा उनके पास नहीं है।
पार्टी के भीतर असंतोष की यह आग सिर्फ बंगाल विधानसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली में संसद तक पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में भी टीएमसी के कई सांसद पार्टी नेतृत्व से बेहद नाराज हैं। दावा किया जा रहा है कि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में पार्टी के 20 सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजा है। इसके अलावा राज्यसभा में भी पार्टी के दो बड़े चेहरों सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव के इस्तीफे की अटकलें राजनीतिक गलियारों में बेहद गर्म हैं।
इस चौतरफा बगावत ने ममता और अभिषेक पर भारी राजनीतिक दबाव बना दिया है। यही वजह है कि दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनकी मैराथन बैठकों को इस संकट से उबरने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। चर्चा तो यह भी है कि ममता को कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
उधर, संगठनात्मक स्तर पर भी टीएमसी को बड़े झटके लग सकते हैं। हाल ही में गठित की गई नई समितियों में शामिल सांसद माला राय और सयानी घोष के भी विद्रोही खेमे में शामिल होने की जोरदार चर्चाएं हैं। ऋतोब्रत बनर्जी ने साफ कहा कि संख्या 64 के पार पहुंच चुकी है, मुमकिन है कल यह 65 हो जाए। यह सिलसिला थमने वाला नहीं है। इस अभूतपूर्व आंतरिक कलह और बदलते समीकरणों ने बंगाल की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी इस चक्रव्यूह से कैसे निकलती हैं।